अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जोग बियोग भोग भल मंदा। हित अनहित मध्यम भ्रम फंदा।।
मूल पाठ
जोग बियोग भोग भल मंदा। हित अनहित मध्यम भ्रम फंदा।।
जनमु मरनु जहँ लगि जग जालू। संपती बिपति करमु अरु कालू।।
स्रोत अभिलेख 2.92 · पुस्तक पृ. 419, 420
भावार्थ
मूल पाठ के बादसंयोग (मिलना), वियोग (बिछुडऩा), भले-बुरे भोग, शत्रु, मित्र और उदासीन—ये सभी भ्रमके फंदे हैं। जन्म-मृत्यु, सम्पत्ति-विपत्ति, कर्म और काल—जहाँतक जगत्के जंजाल हैं;॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 419 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 जोग बियोग भोग भल मंदा। हित अनहित मध्यम भ्रम फंदा।।
English explanation
Union, separation, pleasant and unpleasant experiences, and friendly, hostile, or neutral relations are snares of delusion.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जोग | मिलन | union |
| बियोग | वियोग | separation |
| भोग | अनुभव या भोग | experiences or enjoyments |
| भल | अच्छे | pleasant |
| मंदा | बुरे | unpleasant |
| हित | हितकारी | friendly or beneficial |
| अनहित | अहितकारी | hostile or harmful |
| मध्यम | तटस्थ | neutral |
| भ्रम | भ्रम के | of delusion |
| फंदा | फंदे | snares |
2 जनमु मरनु जहँ लगि जग जालू। संपती बिपति करमु अरु कालू।।
English explanation
Birth, death, and the entire web of worldly existence—including prosperity, adversity, action, and time—belong to this same sphere.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जनमु | जन्म | birth |
| मरनु | मृत्यु | death |
| जहँ | जहाँ तक | as far as |
| लगि | तक | up to |
| जग | संसार का | of worldly existence |
| जालू | जाल | web |
| संपती | समृद्धि | prosperity |
| बिपति | विपत्ति | adversity |
| करमु | कर्म | action |
| अरु | और | and |
| कालू | काल | time |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.92
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 419
- सहायक विषय
- लक्ष्मण-निषाद-संवाद, श्रीराम-सीतासे सुमन्त्रका संवाद, सुमन्त्रका लौटना
- मुद्रित पृष्ठ
- 419, 420
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।