अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जे महिसुर दसरथ पुर बासी। जे मिथिलापति नगर निवासी।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दजो दशरथजीकी नगरी अयोध्याके रहनेवाले और जो मिथिलापति जनकजीके नगर जनकपुरके रहनेवाले ब्राह्मण थे, तथा सूर्यवंशके गुरु वसिष्ठजी तथा जनकजीके पुरोहित शतानन्दजी, जिन्होंने सांसारिक अभ्युदयका मार्ग तथा परमार्थका मार्ग छान डाला था,॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 575 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
जे महिसुर दसरथ पुर बासी। जे मिथिलापति नगर निवासी।।
हंस बंस गुर जनक पुरोधा। जिन्ह जग मगु परमारथु सोधा।।
स्रोत अभिलेख 2.278 · पुस्तक पृ. 575, 576
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 जे महिसुर दसरथ पुर बासी। जे मिथिलापति नगर निवासी।।
English explanation
The Brahmins who lived in Dasharatha’s city and those who lived in the city of Janaka, lord of Mithila—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जे | जो | those who |
| महिसुर | ब्राह्मण; पृथ्वी के देव कहे जाने वाले | Brahmins, called gods on earth |
| दसरथ | राजा दशरथ की | of King Dasharatha |
| पुर | नगरी, अयोध्या | city, Ayodhya |
| बासी | रहने वाले | inhabitants |
| जे | जो | those who |
| मिथिलापति | मिथिला के राजा जनक की | of Janaka, king of Mithila |
| नगर | नगरी | city |
| निवासी | रहने वाले | residents |
2 हंस बंस गुर जनक पुरोधा। जिन्ह जग मगु परमारथु सोधा।।
English explanation
Vasishtha, preceptor of the solar dynasty, and Janaka’s priest, who had discerned and clarified the path to spiritual welfare in the world—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| हंस | सूर्य | the sun |
| बंस | वंश | dynasty |
| गुर | गुरु वसिष्ठ | the preceptor Vasishtha |
| जनक | राजा जनक के | of King Janaka |
| पुरोधा | पुरोहित | priest |
| जिन्ह | जिन्होंने | who |
| जग | संसार में | in the world |
| मगु | मार्ग | the path |
| परमारथु | परमार्थ का; परम आध्यात्मिक हित का | of spiritual welfare |
| सोधा | खोजा और स्पष्ट किया | discerned and clarified |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.278
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 575
- सहायक विषय
- जनकजीका पहुँचना, कोल-किरातादिकी भेंट, सबका परस्पर मिलाप
- मुद्रित पृष्ठ
- 575, 576
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।