अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जे भरि नयन बिलोकहिं रामहि। सीता लखन सहित घनस्यामहि।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दजो नेत्र भरकर सीताजी और लक्ष्मणजीसहित घनश्याम श्रीरामजीके दर्शन करते हैं, जिन तालाबों और नदियोंमें श्रीरामजी स्नान कर लेते हैं, देवसरोवर और देवनदियाँ भी उनकी बड़ाई करती हैं॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 437 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
जे भरि नयन बिलोकहिं रामहि। सीता लखन सहित घनस्यामहि।।
जे सर सरित राम अवगाहहिं। तिन्हहि देव सर सरित सराहहिं।।
स्रोत अभिलेख 2.113 · पुस्तक पृ. 437, 438
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 जे भरि नयन बिलोकहिं रामहि। सीता लखन सहित घनस्यामहि।।
English explanation
Those who gaze to their eyes' content upon cloud-dark Rama, accompanied by Sita and Lakshmana—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जे | जो लोग | those who |
| भरि | भरकर; भरपूर | to the full |
| नयन | आँखें | their eyes |
| बिलोकहिं | देखते हैं | gaze upon |
| रामहि | राम को | Rama |
| सीता | सीता | Sita, Rama's wife |
| लखन | लक्ष्मण | Lakshmana, Rama's brother |
| सहित | के साथ | accompanied by |
| घनस्यामहि | मेघ-समान श्याम राम को | cloud-dark Rama |
2 जे सर सरित राम अवगाहहिं। तिन्हहि देव सर सरित सराहहिं।।
English explanation
The celestial lakes and rivers praise those lakes and rivers in which Rama bathes.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जे | जिन | in which |
| सर | सरोवरों | lakes |
| सरित | नदियों | rivers |
| राम | राम | Rama |
| अवगाहहिं | स्नान करते हैं | bathes |
| तिन्हहि | उन्हीं की | those very waters |
| देव | दिव्य; देवलोक के | celestial |
| सर | सरोवर | lakes |
| सरित | नदियाँ | rivers |
| सराहहिं | प्रशंसा करते हैं | praise |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.113
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 437
- सहायक विषय
- यमुनाको प्रणाम, वनवासियोंका प्रेम
- मुद्रित पृष्ठ
- 437, 438
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।