अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जे पुर गाँव बसहिं मग माहीं। तिन्हहि नाग सुर नगर सिहाहीं।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दजो गाँव और पुरवे रास्तेमें बसे हैं, नागों और देवताओंके नगर उनको देखकर प्रशंसापूर्वक ईष्र्या करते और ललचाते हुए कहते हैं कि किस पुण्यवान्ने किस शुभ घड़ीमें इनको बसाया था, जो आज ये इतने धन्य और पुण्यमय तथा परम सुन्दर हो रहे हैं॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 437 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
जे पुर गाँव बसहिं मग माहीं। तिन्हहि नाग सुर नगर सिहाहीं।।
केहि सुकृतीं केहि घरीं बसाए। धन्य पुन्यमय परम सुहाए।।
स्रोत अभिलेख 2.113 · पुस्तक पृ. 437, 438
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 जे पुर गाँव बसहिं मग माहीं। तिन्हहि नाग सुर नगर सिहाहीं।।
English explanation
The cities of the serpent realm and heaven envy the towns and villages situated along the route.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जे | जो | which |
| पुर | नगर | towns |
| गाँव | गाँव | villages |
| बसहिं | बसे हैं | are situated |
| मग | मार्ग | the route |
| माहीं | में | in; along |
| तिन्हहि | उन्हीं से | those very places |
| नाग | नागों के | of the divine serpents |
| सुर | देवताओं के | of the gods |
| नगर | नगर | cities |
| सिहाहीं | ईर्ष्या करते हैं | envy |
2 केहि सुकृतीं केहि घरीं बसाए। धन्य पुन्यमय परम सुहाए।।
English explanation
What virtuous person founded them, and at what auspicious hour! They are blessed, filled with merit, and exceedingly lovely.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| केहि | किस | which |
| सुकृतीं | पुण्यात्मा ने | virtuous person |
| केहि | किस | at what |
| घरीं | घड़ी में | hour |
| बसाए | बसाया | founded them |
| धन्य | धन्य | blessed |
| पुन्यमय | पुण्य से भरे | filled with merit |
| परम | अत्यंत | exceedingly |
| सुहाए | सुंदर | lovely |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.113
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 437
- सहायक विषय
- यमुनाको प्रणाम, वनवासियोंका प्रेम
- मुद्रित पृष्ठ
- 437, 438
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।