अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जे जन कहहिं कुसल हम देखे। ते प्रिय राम लखन सम लेखे।।
मूल पाठ
जे जन कहहिं कुसल हम देखे। ते प्रिय राम लखन सम लेखे।।
एहि बिधि बूझत सबहि सुबानी। सुनत राम बनबास कहानी।।
स्रोत अभिलेख 2.224 · पुस्तक पृ. 529, 530
भावार्थ
मूल पाठ के बादजो लोग कहते हैं कि हमने उनको कुशलपूर्वक देखा है, उनको ये श्रीराम-लक्ष्मणके समान ही प्यारे मानते हैं। इस प्रकार सबसे सुन्दर वाणीसे पूछते और श्रीरामजीके वनवासकी कहानी सुनते जाते हैं॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 530 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 जे जन कहहिं कुसल हम देखे। ते प्रिय राम लखन सम लेखे।।
English explanation
Those who say, ‘We saw them safe and well,’ are regarded by Bharata as dear as Rama and Lakshmana.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जे | जो | those who |
| जन | लोग | people |
| कहहिं | कहते हैं | say |
| कुसल | कुशल; सकुशल | safe and well |
| हम | हमने | we |
| देखे | देखा है | have seen |
| ते | वे लोग | those people |
| प्रिय | प्रिय | dear |
| राम | राम | Rama |
| लखन | लक्ष्मण | Lakshmana |
| सम | के समान | as much as |
| लेखे | माने गए; भरत ने माना | were regarded by Bharata |
2 एहि बिधि बूझत सबहि सुबानी। सुनत राम बनबास कहानी।।
English explanation
In this way Bharata asks everyone in gentle speech and listens to accounts of Rama’s forest exile.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| एहि | इस | this |
| बिधि | प्रकार | way |
| बूझत | पूछते हुए | asking |
| सबहि | सबसे | everyone |
| सुबानी | मधुर वाणी से | with gentle speech |
| सुनत | सुनते हुए | listening to |
| राम | राम के | of Rama |
| बनबास | वनवास की | forest exile |
| कहानी | कथा | accounts |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.224
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 530
- सहायक विषय
- भरतजी चित्रकूटके मार्गमें
- मुद्रित पृष्ठ
- 529, 530
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।