अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जीवन लाहु लखन भल पावा। सबु तजि राम चरन मनु लावा।।
मूल पाठ
जीवन लाहु लखन भल पावा। सबु तजि राम चरन मनु लावा।।
मोर जनम रघुबर बन लागी। झूठ काह पछिताउँ अभागी।।
स्रोत अभिलेख 2.182 · पुस्तक पृ. 494, 495
भावार्थ
मूल पाठ के बादजीवनका उत्तम लाभ तो लक्ष्मणने पाया, जिन्होंने सब कुछ तजकर श्रीरामजीके चरणोंमें मन लगाया। मेरा जन्म तो श्रीरामजीके वनवासके लिये ही हुआ था। मैं अभागा झूठ-मूठ क्या पछताता हूँ?॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 494 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 जीवन लाहु लखन भल पावा। सबु तजि राम चरन मनु लावा।।
English explanation
Lakshmana has gained life's true reward: abandoning everything, he devoted his mind to Rama's feet.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जीवन | जीवन का | of life |
| लाहु | लाभ | reward |
| लखन | लक्ष्मण ने | Lakshmana, Rama's brother |
| भल | उत्तम | excellent |
| पावा | पाया | obtained |
| सबु | सब कुछ | everything |
| तजि | छोड़कर | abandoning |
| राम | राम के | Rama's |
| चरन | चरणों में | at the feet |
| मनु | मन | his mind |
| लावा | लगाया | fixed |
2 मोर जनम रघुबर बन लागी। झूठ काह पछिताउँ अभागी।।
English explanation
My very birth became the cause of Rama's going to the forest; why do I, unfortunate as I am, now regret it in vain?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मोर | मेरा | my |
| जनम | जन्म | birth |
| रघुबर | रघुकुलश्रेष्ठ राम के | of Rama, foremost of Raghu's line |
| बन | वन जाने | going to the forest |
| लागी | का कारण | the cause |
| झूठ | व्यर्थ | in vain |
| काह | क्यों | why |
| पछिताउँ | पछताता हूँ | do I regret |
| अभागी | मैं अभागा | I, the unfortunate one |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.182
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 494
- सहायक विषय
- वसिष्ठ-भरत-संवाद, श्रीरामजीको लानेके लिये चित्रकूट जानेकी तैयारी
- मुद्रित पृष्ठ
- 494, 495
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।