अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जिऐ मीन बरू बारि बिहीना। मनि बिनु फनिकु जिऐ दुख दीना।।
मूल पाठ
जिऐ मीन बरू बारि बिहीना। मनि बिनु फनिकु जिऐ दुख दीना।।
कहउँ सुभाउ न छलु मन माहीं। जीवनु मोर राम बिनु नाहीं।।
स्रोत अभिलेख 2.33 · पुस्तक पृ. 371, 371
भावार्थ
मूल पाठ के बादमछली चाहे बिना पानीके जीती रहे और सँाप भी चाहे बिना मणिके दीन-दुखी होकर जीता रहे। परन्तु मैं स्वभावसे ही कहता हूँ, मनमें [जरा भी] छल रखकर नहीं कि मेरा जीवन रामके बिना नहीं है॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 371 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 जिऐ मीन बरू बारि बिहीना। मनि बिनु फनिकु जिऐ दुख दीना।।
English explanation
AI-generated interpretive draft: A fish might conceivably live without water, and a serpent without its jewel might live in misery.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जिऐ | जी ले | might live |
| मीन | मछली | a fish |
| बरू | भले ही | even if; conceivably |
| बारि | जल | water |
| बिहीना | से रहित | without |
| मनि | मणि | its jewel |
| बिनु | बिना | without |
| फनिकु | फणधारी साँप | a hooded serpent |
| जिऐ | जी ले | might live |
| दुख | दुःख से | with suffering |
| दीना | व्याकुल | miserable |
2 कहउँ सुभाउ न छलु मन माहीं। जीवनु मोर राम बिनु नाहीं।।
English explanation
I speak my true feelings; there is no deceit in my heart. I cannot live without Rama.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कहउँ | मैं कहता हूँ | I say |
| सुभाउ | अपना सहज, सच्चा भाव | my genuine feeling |
| न | नहीं | no |
| छलु | छल | deceit |
| मन | मन | the heart |
| माहीं | में | within |
| जीवनु | जीवन | life |
| मोर | मेरा | my |
| राम | राम | Rama, Dasharatha’s son |
| बिनु | बिना | without |
| नाहीं | नहीं है | cannot exist |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.33
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 371
- सहायक विषय
- दशरथ-कैकेयी-संवाद और दशरथ-शोक, सुमन्त्रका महलमें जाना और वहाँसे लौटकर श्रीरामजीको महलमें भेजना
- मुद्रित पृष्ठ
- 371, 371
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।