अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जासु ग्यानु रबि भव निसि नासा। बचन किरन मुनि कमल बिकासा।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दजिन राजा जनकका ज्ञानरूपी सूर्य भव (आवागमन) रूपी रात्रिका नाश कर देता है, और जिनकी वचनरूपी किरणें मुनिरूपी कमलोंको खिला देती हैं (आनन्दित करती हैं), क्या मोह और ममता उनके निकट भी आ सकते हैं? यह तो श्रीसीतारामजीके प्रेमकी महिमा है! [अर्थात् राजा जनककी यह दशा श्रीसीतारामजीके अलौकिक प्रेमके कारण हुई, लौकिक मोह-ममताके कारण नहीं। जो लौकिक मोह-ममताको पार कर चुके हैं उनपर भी श्रीसीतारामजीका प्रेम अपना प्रभाव दिखाये बिना नहीं रहता]॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 574 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
जासु ग्यानु रबि भव निसि नासा। बचन किरन मुनि कमल बिकासा।।
तेहि कि मोह ममता निअराई। यह सिय राम सनेह बड़ाई।।
स्रोत अभिलेख 2.277 · पुस्तक पृ. 574, 575
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 जासु ग्यानु रबि भव निसि नासा। बचन किरन मुनि कमल बिकासा।।
English explanation
Janaka’s knowledge is a sun that dispels the night of worldly existence, and the rays of his words make the lotus-like sages bloom.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जासु | जिनका—राजा जनक का | whose—King Janaka’s |
| ग्यानु | ज्ञान | knowledge |
| रबि | सूर्य | sun |
| भव | संसार; सांसारिक अस्तित्व | worldly existence |
| निसि | रात | night |
| नासा | नाश करने वाला | destroying; dispelling |
| बचन | वचन | words; utterances |
| किरन | किरणें | rays |
| मुनि | मुनि; मननशील ऋषि | sages |
| कमल | कमल | lotuses |
| बिकासा | खिलाने वाली | causing to bloom |
2 तेहि कि मोह ममता निअराई। यह सिय राम सनेह बड़ाई।।
English explanation
Could delusion and possessive attachment approach such a Janaka? This is the greatness of his love for Sita and Rama.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तेहि | उनके पास; उन जनक को | to him; to Janaka |
| कि | क्या | could; can |
| मोह | मोह; भ्रमपूर्ण आसक्ति | delusion; attachment |
| ममता | ममत्व; अपना मानने की आसक्ति | possessive attachment |
| निअराई | निकट आना | come near |
| यह | यह दशा | this state |
| सिय | सीता | Sita, Janaka’s daughter |
| राम | श्रीराम | Rama |
| सनेह | प्रेम | love |
| बड़ाई | महिमा; महानता | greatness; glory |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.277
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 574
- सहायक विषय
- जनकजीका पहुँचना, कोल-किरातादिकी भेंट, सबका परस्पर मिलाप
- मुद्रित पृष्ठ
- 574, 575
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।