अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जानहुँ रामु कुटिल करि मोही। लोग कहउ गुर साहिब द्रोही।।
मूल पाठ
जानहुँ रामु कुटिल करि मोही। लोग कहउ गुर साहिब द्रोही।।
सीता राम चरन रति मोरें। अनुदिन बढ़उ अनुग्रह तोरें।।
स्रोत अभिलेख 2.205 · पुस्तक पृ. 513, 514
भावार्थ
मूल पाठ के बादस्वयं श्रीरामचन्द्रजी भी भले ही मुझे कुटिल समझें और लोग मुझे गुरुद्रोही तथा स्वामिद्रोही भले ही कहें; पर श्रीसीतारामजीके चरणोंमें मेरा प्रेम आपकी कृपासे दिन-दिन बढ़ता ही रहे॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 513 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 जानहुँ रामु कुटिल करि मोही। लोग कहउ गुर साहिब द्रोही।।
English explanation
AI-generated interpretive draft: Even if Rama considers me deceitful and people call me a betrayer of my teacher and master.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जानहुँ | समझें, भले ही मानें | may consider |
| रामु | श्रीराम | Rama |
| कुटिल | कपटी, टेढ़े मन वाला | deceitful |
| करि | मानकर, समझकर | taking to be |
| मोही | मुझे | me |
| लोग | लोग | people |
| कहउ | कहें, भले ही कहें | may call |
| गुर | गुरु का | of the teacher |
| साहिब | स्वामी का | of the master |
| द्रोही | विश्वासघाती, द्रोह करने वाला | betrayer |
2 सीता राम चरन रति मोरें। अनुदिन बढ़उ अनुग्रह तोरें।।
English explanation
Through your grace, may my love for the feet of Sita and Rama grow every day.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सीता | श्रीसीता | Sita, Rama’s wife |
| राम | श्रीराम | Rama |
| चरन | चरणों में | at the feet |
| रति | प्रेम, लगाव | love, attachment |
| मोरें | मेरा, मेरे भीतर | my, within me |
| अनुदिन | प्रतिदिन | every day |
| बढ़उ | बढ़ता रहे | may increase |
| अनुग्रह | कृपा से | through grace |
| तोरें | आपकी | your |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.205
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 513
- सहायक विषय
- भरतजीका प्रयाग जाना और भरत-भरद्वाज-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 513, 514
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।