अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जलदु जनम भरि सुरति बिसारउ। जाचत जलु पबि पाहन डारउ।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दमेघ चाहे जन्मभर चातककी सुधि भुला दे और जल माँगनेपर वह चाहे वज्र और पत्थर (ओले) ही गिरावे, पर चातककी रटन घटनेसे तो उसकी बात ही घट जायगी (प्रतिष्ठा ही नष्ट हो जायगी)। उसकी तो प्रेम बढऩेमें ही सब तरहसे भलाई है॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 513 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
जलदु जनम भरि सुरति बिसारउ। जाचत जलु पबि पाहन डारउ।।
चातकु रटनि घटें घटि जाई। बढ़े प्रेमु सब भाँति भलाई।।
स्रोत अभिलेख 2.205 · पुस्तक पृ. 513, 514
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 जलदु जनम भरि सुरति बिसारउ। जाचत जलु पबि पाहन डारउ।।
English explanation
Even if the cloud forgets the chataka bird throughout its life and casts thunderbolts and stones when it asks for water.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जलदु | बादल | the cloud |
| जनम | जीवन | life |
| भरि | भर, पूरे समय | throughout |
| सुरति | सुधि, याद | remembrance, regard |
| बिसारउ | भुला दे | may forget |
| जाचत | माँगने पर | when asking for |
| जलु | पानी | water |
| पबि | वज्र, बिजली का प्रहार | thunderbolt |
| पाहन | पत्थर, ओले-जैसे पत्थर | stones, hail-like stones |
| डारउ | डाल दे, बरसा दे | may cast down |
2 चातकु रटनि घटें घटि जाई। बढ़े प्रेमु सब भाँति भलाई।।
English explanation
If its persistent call diminishes, the chataka loses its worth; increasing love brings good in every way.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| चातकु | चातक पक्षी | the chataka bird |
| रटनि | बार-बार की पुकार, रट | persistent calling |
| घटें | घटने पर | if it diminishes |
| घटि | घट | diminish |
| जाई | जाता है | comes to be |
| बढ़े | बढ़ने पर, बढ़े तो | if it increases |
| प्रेमु | प्रेम | love |
| सब | सभी | every |
| भाँति | प्रकार से | way |
| भलाई | कल्याण, अच्छाई | good, benefit |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.205
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 513
- सहायक विषय
- भरतजीका प्रयाग जाना और भरत-भरद्वाज-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 513, 514
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।