अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जाति पाँति धनु धरम बड़ाई। प्रिय परिवार सदन सुखदाई।।
मूल पाठ
जाति पाँति धनु धरम बड़ाई। प्रिय परिवार सदन सुखदाई।।
सब तजि तुम्हहि रहइ उर लाई। तेहि के हृदयँ रहहु रघुराई।।
स्रोत अभिलेख 2.131 · पुस्तक पृ. 452, 453
भावार्थ
मूल पाठ के बादजाति, पाँति, धन, धर्म, बड़ाई, प्यारा परिवार और सुख देनेवाला घर—सबको छोड़कर जो केवल आपको ही हृदयमें धारण किये रहता है, हे रघुनाथजी! आप उसके हृदयमें रहिये॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 453 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 जाति पाँति धनु धरम बड़ाई। प्रिय परिवार सदन सुखदाई।।
English explanation
Caste, social standing, wealth, religious duty, distinction, beloved family, and a comfortable home—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जाति | जाति | caste |
| पाँति | सामाजिक प्रतिष्ठा | social standing |
| धनु | धन-संपत्ति | wealth |
| धरम | धर्म और धार्मिक कर्तव्य | religion and religious duty |
| बड़ाई | बड़प्पन और प्रतिष्ठा | distinction and prestige |
| प्रिय | प्यारा | beloved |
| परिवार | परिवार | family |
| सदन | घर | home |
| सुखदाई | सुख देने वाला | providing comfort |
2 सब तजि तुम्हहि रहइ उर लाई। तेहि के हृदयँ रहहु रघुराई।।
English explanation
O Lord of the Raghu lineage, dwell in the heart of one who leaves all these behind and keeps you close to their heart.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सब | यह सब | all these |
| तजि | त्यागकर | having renounced |
| तुम्हहि | आपको ही | you alone |
| रहइ | रहता है | remains |
| उर | हृदय से | to the heart |
| लाई | लगाए हुए | holding close |
| तेहि | उस व्यक्ति | that person |
| के | के | of |
| हृदयँ | हृदय में | in the heart |
| रहहु | रहिए | please dwell |
| रघुराई | हे रघुकुल के स्वामी राम | O Rama, lord of the Raghu lineage |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.131
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 453
- सहायक विषय
- श्रीराम-वाल्मीकि-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 452, 453
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।