अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जहँ जस मुनिबर आयसु दीन्हा। तहँ तस सहस भाँति सबु कीन्हा।।
मूल पाठ
जहँ जस मुनिबर आयसु दीन्हा। तहँ तस सहस भाँति सबु कीन्हा।।
भए बिसुद्ध दिए सब दाना। धेनु बाजि गज बाहन नाना।।
स्रोत अभिलेख 2.17 · पुस्तक पृ. 484, 485
भावार्थ
मूल पाठ के बादमुनिश्रेष्ठ वसिष्ठजीने जहाँ जैसी आज्ञा दी, वहाँ भरतजीने सब वैसा ही हजारों प्रकारसे किया। शुद्ध हो जानेपर [विधिपूर्वक] सब दान दिये। गौएँ तथा घोड़े, हाथी आदि अनेक प्रकारकी सवारियाँ,॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 485 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 जहँ जस मुनिबर आयसु दीन्हा। तहँ तस सहस भाँति सबु कीन्हा।।
English explanation
Whenever the eminent sage gave a particular instruction, Bharata carried it out accordingly, fulfilling everything in a thousand ways.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जहँ | जहाँ या जिस अवसर पर | wherever or whenever |
| जस | जैसा | as |
| मुनिबर | श्रेष्ठ मुनि वसिष्ठ ने | the eminent sage Vashishtha |
| आयसु | आदेश | instruction |
| दीन्हा | दिया | gave |
| तहँ | वहाँ या उस अवसर पर | there or then |
| तस | वैसा ही | accordingly |
| सहस | हजार | a thousand |
| भाँति | प्रकार से | ways |
| सबु | सब कुछ | everything |
| कीन्हा | किया | carried out |
2 भए बिसुद्ध दिए सब दाना। धेनु बाजि गज बाहन नाना।।
English explanation
After becoming ritually purified, Bharata made all the charitable gifts: cows, horses, elephants, and various conveyances.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भए | हो गए | became |
| बिसुद्ध | अनुष्ठानिक रूप से शुद्ध | ritually purified |
| दिए | दिए | gave |
| सब | सभी | all |
| दाना | दान | charitable gifts |
| धेनु | गाएँ | cows |
| बाजि | घोड़े | horses |
| गज | हाथी | elephants |
| बाहन | वाहन | conveyances |
| नाना | विविध प्रकार के | of various kinds |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.17
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 485
- सहायक विषय
- वसिष्ठ-भरत-संवाद, श्रीरामजीको लानेके लिये चित्रकूट जानेकी तैयारी
- मुद्रित पृष्ठ
- 484, 485
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।