अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
एहि बिधि दाह क्रिया सब कीन्ही। बिधिवत न्हाइ तिलांजुलि दीन्ही।।
मूल पाठ
एहि बिधि दाह क्रिया सब कीन्ही। बिधिवत न्हाइ तिलांजुलि दीन्ही।।
सोधि सुमृति सब बेद पुराना। कीन्ह भरत दसगात बिधाना।।
स्रोत अभिलेख 2.17 · पुस्तक पृ. 484, 485
भावार्थ
मूल पाठ के बादइस प्रकार सब दाहक्रिया की गयी और सबने विधिपूर्वक स्नान करके तिलाञ्जलि दी। फिर वेद, स्मृति और पुराण सबका मत निश्चय करके उसके अनुसार भरतजीने पिताका दशगात्र- विधान(दस दिनोंके कृत्य) किया॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 484 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 एहि बिधि दाह क्रिया सब कीन्ही। बिधिवत न्हाइ तिलांजुलि दीन्ही।।
English explanation
All the cremation rites were thus performed. After the prescribed bath, an offering of sesame seeds and water was made.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| एहि | इस | this |
| बिधि | प्रकार | manner |
| दाह | दाह-संस्कार की | of cremation |
| क्रिया | क्रियाएँ | rites |
| सब | सभी | all |
| कीन्ही | की गईं | were performed |
| बिधिवत | निर्धारित विधि के अनुसार | according to the prescribed procedure |
| न्हाइ | स्नान करके | having bathed |
| तिलांजुलि | तिल और जल की अंजलि | a cupped-hand offering of sesame seeds and water |
| दीन्ही | अर्पित की | offered |
2 सोधि सुमृति सब बेद पुराना। कीन्ह भरत दसगात बिधाना।।
English explanation
Having consulted the legal-ritual texts, all the Vedas, and the Puranas, Bharata performed the prescribed tenth-day funeral rites.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सोधि | विधान खोजकर और जाँचकर | having consulted and ascertained |
| सुमृति | स्मृति-शास्त्रों में | in the legal-ritual texts |
| सब | सभी | all |
| बेद | वेदों में | in the Vedas |
| पुराना | पुराणों में | in the Puranas |
| कीन्ह | किए | performed |
| भरत | भरत ने | Bharata |
| दसगात | दसवें दिन के अंत्येष्टि-संस्कार | tenth-day funeral rites |
| बिधाना | विधि-विधान | prescribed observances |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.17
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 484
- सहायक विषय
- वसिष्ठ-भरत-संवाद, श्रीरामजीको लानेके लिये चित्रकूट जानेकी तैयारी
- मुद्रित पृष्ठ
- 484, 485
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।