अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जरहिं बिषम जर लेहिं उसासा। कवनि राम बिनु जीवन आसा।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दलोग विषमज्वर (भयानक दु:खकी आग) से जल रहे हैं। लंबी साँसें लेते हुए वे कहते हैं कि श्रीरामचन्द्रजीके बिना जीनेकी कौन आशा है। महान् वियोग [की आशंका] से प्रजा ऐसी व्याकुल हो गयी है मानो पानी सूखनेके समय जलचर जीवोंका समुदाय व्याकुल हो!॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 386 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
जरहिं बिषम जर लेहिं उसासा। कवनि राम बिनु जीवन आसा।।
बिपुल बियोग प्रजा अकुलानी। जनु जलचर गन सूखत पानी।।
स्रोत अभिलेख 2.51 · पुस्तक पृ. 386, 387
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 जरहिं बिषम जर लेहिं उसासा। कवनि राम बिनु जीवन आसा।।
English explanation
They burn with fierce anguish and heave sighs: what hope is there of living without Rama?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जरहिं | जलते हैं | burn |
| बिषम | तीव्र और दारुण | fierce and grievous |
| जर | संताप | anguish |
| लेहिं | लेते हैं | take |
| उसासा | आहें | sighs |
| कवनि | क्या | what |
| राम | राम के | Rama |
| बिनु | बिना | without |
| जीवन | जीवित रहने की | of living |
| आसा | आशा | hope |
2 बिपुल बियोग प्रजा अकुलानी। जनु जलचर गन सूखत पानी।।
English explanation
The people became distraught at the immense pain of separation from Rama, like aquatic creatures when their water dries up.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बिपुल | अत्यधिक | immense |
| बियोग | वियोग से | through separation |
| प्रजा | प्रजा | the people |
| अकुलानी | व्याकुल हो गई | became distraught |
| जनु | मानो | as though |
| जलचर | जल में रहने वाले जीव | aquatic creatures |
| गन | समूह | a multitude |
| सूखत | सूखने पर | as it dries up |
| पानी | पानी | the water |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.51
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 386
- सहायक विषय
- श्रीराम-दशरथ-संवाद, अवध-वासियोंका विषाद, कैकेयीको समझाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 386, 387
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।