अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
अति बिषाद बस लोग लोगाई। गए मातु पहिं रामु गोसाई।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दसभी पुरुष और स्त्रियाँ अत्यन्त विषादके वश हो रहे हैं। स्वामी श्रीरामचन्द्रजी माता कौसल्याके पास गये। उनका मुख प्रसन्न है और चित्तमें चौगुना चाव (उत्साह) है। यह सोच मिट गया है कि राजा कहीं रख न लें। [श्रीरामजीको राजतिलककी बात सुनकर विषाद हुआ था कि सब भाइयोंको छोड़कर बड़े भाई मुझको ही राजतिलक क्यों होता है। अब माता कैकेयीकी आज्ञा और पिताकी मौन सम्मति पाकर वह सोच मिट गया।]॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 386 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
अति बिषाद बस लोग लोगाई। गए मातु पहिं रामु गोसाई।।
मुख प्रसन्न चित चौगुन चाऊ। मिटा सोचु जनि राखै राऊ।।
स्रोत अभिलेख 2.51 · पुस्तक पृ. 386, 387
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 अति बिषाद बस लोग लोगाई। गए मातु पहिं रामु गोसाई।।
English explanation
The men and women were overwhelmed by deep sorrow; Lord Rama went to his mother.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अति | अत्यंत | extremely |
| बिषाद | शोक | sorrow |
| बस | के वश में | overwhelmed by |
| लोग | पुरुष | men |
| लोगाई | स्त्रियाँ | women |
| गए | गए | went |
| मातु | माता कौसल्या के | his mother Kaushalya |
| पहिं | पास | to |
| रामु | राम | Rama |
| गोसाई | प्रभु | the Lord |
2 मुख प्रसन्न चित चौगुन चाऊ। मिटा सोचु जनि राखै राऊ।।
English explanation
Rama's face was cheerful and his heart held fourfold eagerness; his worry that the king might keep him back had vanished.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मुख | मुख | face |
| प्रसन्न | प्रसन्न | cheerful |
| चित | मन में | in his heart |
| चौगुन | चार गुना | fourfold |
| चाऊ | उत्साह | eagerness |
| मिटा | मिट गया | vanished |
| सोचु | चिंता | worry |
| जनि | कहीं ऐसा न हो कि | lest |
| राखै | रोक लें | keep him back |
| राऊ | राजा दशरथ | King Dasharatha |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.51
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 386
- सहायक विषय
- श्रीराम-दशरथ-संवाद, अवध-वासियोंका विषाद, कैकेयीको समझाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 386, 387
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।