अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जग मंगल भल काजु बिचारा। बेगिअ नाथ न लाइअ बारा।।
मूल पाठ
जग मंगल भल काजु बिचारा। बेगिअ नाथ न लाइअ बारा।।
नृपहि मोदु सुनि सचिव सुभाषा। बढ़त बौंड़ जनु लही सुसाखा।।
स्रोत अभिलेख 2.5 · पुस्तक पृ. 347, 348
भावार्थ
मूल पाठ के बादआपने जगत्भरका मङ्गल करनेवाला भला काम सोचा है। हे नाथ! शीघ्रता कीजिये, देर न लगाइये। मन्त्रियोंकी सुन्दर वाणी सुनकर राजाको ऐसा आनन्द हुआ मानो बढ़ती हुई बेल सुन्दर डालीका सहारा पा गयी हो॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 348 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 जग मंगल भल काजु बिचारा। बेगिअ नाथ न लाइअ बारा।।
English explanation
You have conceived a fine undertaking that will bring welfare to the world. My lord, make haste; do not delay.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जग | संसार का | of the world |
| मंगल | कल्याण करने वाला | bringing welfare |
| भल | अच्छा | fine |
| काजु | कार्य | undertaking |
| बिचारा | सोचा है | have conceived |
| बेगिअ | शीघ्रता कीजिए | make haste |
| नाथ | हे स्वामी | my lord |
| न | नहीं | not |
| लाइअ | लगाइए | cause |
| बारा | देर | delay |
2 नृपहि मोदु सुनि सचिव सुभाषा। बढ़त बौंड़ जनु लही सुसाखा।।
English explanation
Hearing the ministers’ gracious words, the king felt joy, as though a growing creeper had found a fine branch to support it.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नृपहि | राजा को | to the king |
| मोदु | आनंद हुआ | joy arose |
| सुनि | सुनकर | having heard |
| सचिव | मंत्रियों की | the ministers’ |
| सुभाषा | सुंदर वाणी | gracious words |
| बढ़त | बढ़ती हुई | growing |
| बौंड़ | बेल | creeper |
| जनु | मानो | as though |
| लही | पा गई | found |
| सुसाखा | अच्छी शाखा | a fine branch |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.5
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 348
- सहायक विषय
- मंगलाचरण
- मुद्रित पृष्ठ
- 347, 348
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।