अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जगु भय मगन गगन भइ बानी। लखन बाहुबलु बिपुल बखानी।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दसारा जगत् भयमें डूब गया। तब लक्ष्मणजीके अपार बाहुबलकी प्रशंसा करती हुई आकाशवाणी हुई—हे तात ! तुम्हारे प्रताप और प्रभावको कौन कह सकता है और कौन जान सकता है?॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 535 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
जगु भय मगन गगन भइ बानी। लखन बाहुबलु बिपुल बखानी।।
तात प्रताप प्रभाउ तुम्हारा। को कहि सकइ को जाननिहारा।।
स्रोत अभिलेख 2.231 · पुस्तक पृ. 535, 536
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 जगु भय मगन गगन भइ बानी। लखन बाहुबलु बिपुल बखानी।।
English explanation
The world was engulfed in fear. A heavenly voice arose, describing Lakshmana’s immense strength.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जगु | जगत | the world |
| भय | भय में | in fear |
| मगन | डूबा हुआ | engulfed |
| गगन | आकाश में | in the sky |
| भइ | हुई | arose |
| बानी | वाणी; आकाशवाणी | a heavenly voice |
| लखन | लक्ष्मण का | of Lakshmana, Rama’s brother |
| बाहुबलु | भुजाओं का बल | strength of arms |
| बिपुल | विशाल | immense |
| बखानी | वर्णन किया | described |
2 तात प्रताप प्रभाउ तुम्हारा। को कहि सकइ को जाननिहारा।।
English explanation
Dear one, who can describe your might and power, and who can truly know them?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तात | हे प्रिय | dear one |
| प्रताप | पराक्रम; तेज | might; glory |
| प्रभाउ | प्रभाव; सामर्थ्य | power; potency |
| तुम्हारा | तुम्हारा | your |
| को | कौन | who |
| कहि | कह | describe |
| सकइ | सकता है | can |
| को | कौन | who |
| जाननिहारा | जानने वाला है | is one who knows |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.231
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 535
- सहायक विषय
- श्रीसीताजीका स्वप्न, श्रीरामजीको कोल-किरातोंद्वारा भरतजीके आगमनकी सूचना, रामजीका शोक, लक्ष्मणजीका क्रोध
- मुद्रित पृष्ठ
- 535, 536
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