अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
चिरजीवी मुनि ग्यान बिकल जनु। बूड़त लहेउ बाल अवलंबनु।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दजनकजीका ज्ञानरूपी चिरंजीवी (मार्कण्डेय) मुनि व्याकुल होकर डूबते-डूबते मानो उस श्रीरामप्रेमरूपी बालकका सहारा पाकर बच गया। वस्तुत: [ज्ञानिशिरोमणि] विदेहराजकी बुद्धि मोहमें मग्र नहीं है। यह तो श्रीसीतारामजीके प्रेमकी महिमा है [जिसने उन-जैसे महान् ज्ञानीके ज्ञानको भी विकल कर दिया]॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 583 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
चिरजीवी मुनि ग्यान बिकल जनु। बूड़त लहेउ बाल अवलंबनु।।
मोह मगन मति नहिं बिदेह की। महिमा सिय रघुबर सनेह की।।
स्रोत अभिलेख 2.286 · पुस्तक पृ. 582, 583
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 चिरजीवी मुनि ग्यान बिकल जनु। बूड़त लहेउ बाल अवलंबनु।।
English explanation
It was as though knowledge, figured as the long-lived sage, became distressed and, while drowning, found support in that child.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| चिरजीवी | दीर्घजीवी | long-lived |
| मुनि | मुनि रूपी | figured as a sage |
| ग्यान | ज्ञान | knowledge |
| बिकल | व्याकुल | distressed |
| जनु | मानो | as though |
| बूड़त | डूबते हुए | while drowning |
| लहेउ | पाया | found |
| बाल | बालक का | the child’s |
| अवलंबनु | सहारा | support |
2 मोह मगन मति नहिं बिदेह की। महिमा सिय रघुबर सनेह की।।
English explanation
King Janaka’s understanding was not immersed in delusion; this was the greatness of his affection for Sita and Rama.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मोह | मोह में | in delusion |
| मगन | डूबी हुई | immersed |
| मति | बुद्धि | understanding |
| नहिं | नहीं थी | was not |
| बिदेह | विदेहराज जनक | Janaka, king of Videha |
| की | की | of |
| महिमा | महिमा | greatness |
| सिय | सीता के प्रति | for Sita |
| रघुबर | रघुवंशश्रेष्ठ राम के प्रति | for Rama, foremost of Raghu’s line |
| सनेह | स्नेह | affection |
| की | की | of |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.286
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 583
- सहायक विषय
- कौसल्या-सुनयना-संवाद, श्रीसीताजीका शील
- मुद्रित पृष्ठ
- 582, 583
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।