अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
उर उमगेउ अंबुधि अनुरागू। भयउ भूप मनु मनहुँ पयागू।।
मूल पाठ
उर उमगेउ अंबुधि अनुरागू। भयउ भूप मनु मनहुँ पयागू।।
सिय सनेह बटु बाढ़त जोहा। ता पर राम पेम सिसु सोहा।।
स्रोत अभिलेख 2.286 · पुस्तक पृ. 582, 583
भावार्थ
मूल पाठ के बादउनके हृदयमें [वात्सल्य] प्रेमका समुद्र उमड़ पड़ा। राजाका मन मानो प्रयाग हो गया। उस समुद्रके अंदर उन्होंने [आदिशक्ति] सीताजीके [अलौकिक] स्नेहरूपी अक्षयवटको बढ़ते हुए देखा। उस (सीताजीके प्रेमरूपी वट) पर श्रीरामजीका प्रेमरूपी बालक (बालरूपधारी भगवान्) सुशोभित हो रहा है॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 582 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 उर उमगेउ अंबुधि अनुरागू। भयउ भूप मनु मनहुँ पयागू।।
English explanation
An ocean of affection surged in his heart; the king’s mind became, as it were, Prayag.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| उर | हृदय में | in the heart |
| उमगेउ | उमड़ पड़ा | surged |
| अंबुधि | समुद्र | ocean |
| अनुरागू | प्रेम का | of affection |
| भयउ | हो गया | became |
| भूप | राजा जनक का | King Janaka’s |
| मनु | मन | mind |
| मनहुँ | मानो | as though |
| पयागू | तीर्थ प्रयाग | the sacred confluence at Prayag |
2 सिय सनेह बटु बाढ़त जोहा। ता पर राम पेम सिसु सोहा।।
English explanation
The banyan tree of affection for Sita was seen growing; upon it shone the infant of love for Rama.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सिय | सीता के प्रति | for Sita |
| सनेह | स्नेह रूपी | affection, figured as |
| बटु | वट-वृक्ष | a banyan tree |
| बाढ़त | बढ़ता हुआ | growing |
| जोहा | दिखाई दिया | was seen |
| ता | उस वट पर | that banyan |
| पर | पर | upon |
| राम | राम के प्रति | for Rama |
| पेम | प्रेम रूपी | love, figured as |
| सिसु | शिशु | an infant |
| सोहा | सुशोभित हुआ | shone beautifully |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.286
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 582
- सहायक विषय
- कौसल्या-सुनयना-संवाद, श्रीसीताजीका शील
- मुद्रित पृष्ठ
- 582, 583
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