अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
चित्रकूट रघुनंदनु छाए। समाचार सुनि सुनि मुनि आए।।
मूल पाठ
चित्रकूट रघुनंदनु छाए। समाचार सुनि सुनि मुनि आए।।
आवत देखि मुदित मुनिबृंदा। कीन्ह दंडवत रघुकुल चंदा।।
स्रोत अभिलेख 2.134 · पुस्तक पृ. 455, 456
भावार्थ
मूल पाठ के बादश्रीरघुनाथजी चित्रकूटमें आ बसे हैं, यह समाचार सुन-सुनकर बहुत-से मुनि आये। रघुकुलके चन्द्रमा श्रीरामचन्द्रजीने मुदित हुई मुनिमण्डलीको आते देखकर दण्डवत् प्रणाम किया॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 455 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 चित्रकूट रघुनंदनु छाए। समाचार सुनि सुनि मुनि आए।।
English explanation
Rama, the delight of Raghu’s lineage, took up residence in Chitrakoot. As the sages heard the news, they came.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| चित्रकूट | चित्रकूट में | in Chitrakoot |
| रघुनंदनु | रघुवंश को आनंद देने वाले राम | Rama, delight of Raghu’s lineage |
| छाए | आकर बसे | took up residence |
| समाचार | समाचार | the news |
| सुनि | सुनकर | having heard |
| सुनि | सुनकर | having heard |
| मुनि | मुनि | sages |
| आए | आए | came |
2 आवत देखि मुदित मुनिबृंदा। कीन्ह दंडवत रघुकुल चंदा।।
English explanation
Seeing the company of sages approaching, Rama, the moon of Raghu’s lineage, rejoiced and prostrated himself before them.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| आवत | आते हुए | approaching |
| देखि | देखकर | seeing |
| मुदित | प्रसन्न हुए | rejoiced |
| मुनिबृंदा | मुनियों के समूह को | the company of sages |
| कीन्ह | किया | performed |
| दंडवत | भूमि पर सीधे लेटकर प्रणाम | a full prostration |
| रघुकुल | रघु के कुल का | of Raghu’s lineage |
| चंदा | चंद्रमा, अर्थात राम | the moon, meaning Rama |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.134
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 455
- सहायक विषय
- चित्रकूटमें निवास, कोल-भीलोंके द्वारा सेवा
- मुद्रित पृष्ठ
- 455, 456
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।