अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
चहत न भरत भूपतहि भोरें। बिधि बस कुमति बसी जिय तोरें।।
मूल पाठ
चहत न भरत भूपतहि भोरें। बिधि बस कुमति बसी जिय तोरें।।
सो सबु मोर पाप परिनामू। भयउ कुठाहर जेहिं बिधि बामू।।
स्रोत अभिलेख 2.36 · पुस्तक पृ. 373, 374
भावार्थ
मूल पाठ के बादभरत तो भूलकर भी राजपद नहीं चाहते। होनहारवश तेरे ही जीमें कुमति आ बसी। यह सब मेरे पापोंका परिणाम है, जिससे कुसमयमें (बेमौके) विधाता विपरीत हो गया॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 373 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 चहत न भरत भूपतहि भोरें। बिधि बस कुमति बसी जिय तोरें।।
English explanation
AI-generated interpretation draft: Bharata does not desire kingship even inadvertently. Under fate’s sway, misguided thinking has settled in your heart.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| चहत | चाहते हैं | desires |
| न | नहीं | not |
| भरत | भरत, राम के भाई | Bharata, Rama’s brother |
| भूपतहि | राजपद | kingship |
| भोरें | भूलकर भी | even inadvertently |
| बिधि | विधाता या भाग्य | Providence or fate |
| बस | के वश में | under the sway of |
| कुमति | बुरी बुद्धि | misguided thinking |
| बसी | बस गई है | has settled |
| जिय | हृदय में | in the heart |
| तोरें | तुम्हारे | your |
2 सो सबु मोर पाप परिनामू। भयउ कुठाहर जेहिं बिधि बामू।।
English explanation
All this is the result of my sin, through which adverse Providence turned against me at an ill-chosen moment.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सो | वह, यह सब घटना | that, this situation |
| सबु | सब | all |
| मोर | मेरे | my |
| पाप | पाप का | of sin |
| परिनामू | परिणाम | result |
| भयउ | हो गया | became |
| कुठाहर | अनुचित स्थान या अवसर पर | at an ill-chosen place or moment |
| जेहिं | जिसके कारण | because of which |
| बिधि | विधाता | Providence |
| बामू | प्रतिकूल | adverse |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.36
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 373
- सहायक विषय
- दशरथ-कैकेयी-संवाद और दशरथ-शोक, सुमन्त्रका महलमें जाना और वहाँसे लौटकर श्रीरामजीको महलमें भेजना
- मुद्रित पृष्ठ
- 373, 374
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।