अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
चक्क चक्कि जिमि पुर नर नारी। चहत प्रात उर आरत भारी।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दनगरके नर-नारी चकवे-चकवीकी भाँति हृदयमें अत्यन्त आर्त होकर प्रात:कालका होना चाहते हैं। सारी रात जागते-जागते सबेरा हो गया। तब भरतजीने चतुर मन्त्रियोंको बुलवाया—॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 498 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
चक्क चक्कि जिमि पुर नर नारी। चहत प्रात उर आरत भारी।।
जागत सब निसि भयउ बिहाना। भरत बोलाए सचिव सुजाना।।
स्रोत अभिलेख 2.187 · पुस्तक पृ. 498, 498
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 चक्क चक्कि जिमि पुर नर नारी। चहत प्रात उर आरत भारी।।
English explanation
Like male and female chakravaka birds, the city's men and women longed for dawn, their hearts deeply distressed.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| चक्क | चकवा पक्षी | male chakravaka bird |
| चक्कि | चकवी पक्षी | female chakravaka bird |
| जिमि | जैसे | like |
| पुर | नगर के | of the city |
| नर | पुरुष | men |
| नारी | स्त्रियाँ | women |
| चहत | चाहते थे; बाट जोहते थे | longed for; awaited |
| प्रात | प्रभात | dawn |
| उर | हृदय में | in their hearts |
| आरत | व्याकुलता | distress |
| भारी | बहुत बड़ी | intense |
2 जागत सब निसि भयउ बिहाना। भरत बोलाए सचिव सुजाना।।
English explanation
Dawn came as everyone stayed awake through the night. Bharata summoned the wise ministers.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जागत | जागते हुए | while staying awake |
| सब | सभी | everyone |
| निसि | रात भर | through the night |
| भयउ | हो गया | came; became |
| बिहाना | सवेरा | morning |
| भरत | भरत ने, राम के भाई ने | Bharata, Rama's brother |
| बोलाए | बुलाया | summoned |
| सचिव | मंत्रियों को | the ministers |
| सुजाना | समझदार | wise |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.187
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 498
- सहायक विषय
- अयोध्यावासियोंसहित श्रीभरत-शत्रुघ्न आदिका वनगमन
- मुद्रित पृष्ठ
- 498, 498
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