अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
घर मसान परिजन जनु भूता। सुत हित मीत मनहुँ जमदूता।।
मूल पाठ
घर मसान परिजन जनु भूता। सुत हित मीत मनहुँ जमदूता।।
बागन्ह बिटप बेलि कुम्हिलाहीं। सरित सरोवर देखि न जाहीं।।
स्रोत अभिलेख 2.83 · पुस्तक पृ. 412, 412
भावार्थ
मूल पाठ के बादघर श्मशान, कुटुम्बी भूत-प्रेत और पुत्र, हितैषी और मित्र मानो यमराजके दूत हैं। बगीचोंमें वृक्ष और बेलें कुम्हला रही हैं। नदी और तालाब ऐसे भयानक लगते हैं कि उनकी ओर देखा भी नहीं जाता॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 412 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 घर मसान परिजन जनु भूता। सुत हित मीत मनहुँ जमदूता।।
English explanation
Homes seem like cremation grounds and relatives like ghosts; sons, well-wishers, and friends seem like messengers of death.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| घर | घर | homes |
| मसान | श्मशान | cremation grounds |
| परिजन | परिवार के लोग | family members |
| जनु | मानो | as though |
| भूता | भूत | ghosts |
| सुत | पुत्र | sons |
| हित | हितैषी | well-wishers |
| मीत | मित्र | friends |
| मनहुँ | मानो | as though |
| जमदूता | यम के दूत | messengers of Yama, the god of death |
2 बागन्ह बिटप बेलि कुम्हिलाहीं। सरित सरोवर देखि न जाहीं।।
English explanation
Trees and creepers in the gardens are withering; the rivers and lakes are unbearable to look at.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बागन्ह | बागों में | in the gardens |
| बिटप | पेड़ | trees |
| बेलि | बेलें | creepers |
| कुम्हिलाहीं | मुरझा रही हैं | are withering |
| सरित | नदियाँ | rivers |
| सरोवर | तालाब; सरोवर | lakes; ponds |
| देखि | देखे | looked at |
| न | नहीं | not |
| जाहीं | जा सकते | can be |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.83
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 412
- सहायक विषय
- श्रीराम-सीता-लक्ष्मणका वनगमन और नगर-निवासियोंको सोये छोड़कर आगे बढ़ना
- मुद्रित पृष्ठ
- 412, 412
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।