अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
गुरहि देखि सानुज अनुरागे। दंड प्रनाम करन प्रभु लागे।।
मूल पाठ
गुरहि देखि सानुज अनुरागे। दंड प्रनाम करन प्रभु लागे।।
मुनिबर धाइ लिए उर लाई। प्रेम उमगि भेंटे दोउ भाई।।
स्रोत अभिलेख 2.243 · पुस्तक पृ. 546, 546
भावार्थ
मूल पाठ के बादगुरुजीके दर्शन करके लक्ष्मणजीसहित प्रभु श्रीरामचन्द्रजी प्रेममें भर गये और दण्डवत् प्रणाम करने लगे। मुनिश्रेष्ठ वसिष्ठजीने दौड़कर उन्हें हृदयसे लगा लिया और प्रेममें उमँगकर वे दोनों भाइयोंसे मिले॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 546 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 गुरहि देखि सानुज अनुरागे। दंड प्रनाम करन प्रभु लागे।।
English explanation
Seeing their teacher, Rama and his younger brother were filled with affection, and the Lord began to prostrate in reverence.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| गुरहि | गुरु को | the teacher |
| देखि | देखकर | having seen |
| सानुज | छोटे भाई लक्ष्मण सहित | with his younger brother Lakshmana |
| अनुरागे | प्रेम से भर गए | became filled with affection |
| दंड | दंडवत; शरीर सीधा फैलाकर | full-length, with the body stretched out |
| प्रनाम | प्रणाम | reverential obeisance |
| करन | करने | to perform |
| प्रभु | प्रभु राम | Lord Rama |
| लागे | लगे | began |
2 मुनिबर धाइ लिए उर लाई। प्रेम उमगि भेंटे दोउ भाई।।
English explanation
The eminent sage rushed forward and clasped them to his breast, embracing both brothers with overflowing affection.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मुनिबर | श्रेष्ठ मुनि वसिष्ठ | the eminent sage Vasishtha |
| धाइ | दौड़कर | having rushed forward |
| लिए | ले लिया | took them |
| उर | हृदय से | to his breast |
| लाई | लगाकर | clasping |
| प्रेम | प्रेम | affection |
| उमगि | उमड़ने पर | as it welled up |
| भेंटे | गले लगाया | embraced |
| दोउ | दोनों | both |
| भाई | भाइयों को | brothers |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.243
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 546
- सहायक विषय
- भरतजीका मन्दाकिनी-स्नान, चित्रकूटमें पहुँचना, भरतादि सबका परस्पर मिलाप, पिताका शोक और श्राद्ध
- मुद्रित पृष्ठ
- 546, 546
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।