अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सीलसिंधु सुनि गुर आगवनू। सिय समीप राखे रिपुदवनू।।
मूल पाठ
सीलसिंधु सुनि गुर आगवनू। सिय समीप राखे रिपुदवनू।।
चले सबेग रामु तेहि काला। धीर धरम धुर दीनदयाला।।
स्रोत अभिलेख 2.243 · पुस्तक पृ. 546, 546
भावार्थ
मूल पाठ के बादगुरुका आगमन सुनकर शीलके समुद्र श्रीरामचन्द्रजीने सीताजीके पास शत्रुघ्नजीको रख दिया और वे परम धीर, धर्मधुरन्धर, दीनदयालु श्रीरामचन्द्रजी उसी समय वेगके साथ चल पड़े॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 546 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 सीलसिंधु सुनि गुर आगवनू। सिय समीप राखे रिपुदवनू।।
English explanation
AI draft: Rama, an ocean of noble conduct, heard of his teacher’s arrival and left Shatrughna beside Sita.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सीलसिंधु | शील के सागर राम | Rama, an ocean of noble conduct |
| सुनि | सुनकर | having heard |
| गुर | गुरु वसिष्ठ का | of the teacher Vasishtha |
| आगवनू | आगमन | arrival |
| सिय | सीता के | of Sita |
| समीप | पास | beside |
| राखे | रखा | left stationed |
| रिपुदवनू | शत्रुओं के दमनकर्ता शत्रुघ्न को | Shatrughna, subduer of enemies |
2 चले सबेग रामु तेहि काला। धीर धरम धुर दीनदयाला।।
English explanation
At once Rama went swiftly—steadfast, the mainstay of righteousness, and compassionate toward the lowly.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| चले | चल पड़े | set out |
| सबेग | तेजी से | swiftly |
| रामु | राम | Rama |
| तेहि | उसी | that very |
| काला | समय | time |
| धीर | धैर्यवान | steadfast |
| धरम | धर्म की | of righteousness |
| धुर | धुरी; मुख्य आधार | mainstay; central support |
| दीनदयाला | दीनों पर दया करने वाले | compassionate toward the lowly |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.243
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 546
- सहायक विषय
- भरतजीका मन्दाकिनी-स्नान, चित्रकूटमें पहुँचना, भरतादि सबका परस्पर मिलाप, पिताका शोक और श्राद्ध
- मुद्रित पृष्ठ
- 546, 546
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।