अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
गुँह बोलाइ पाहरू प्रतीती। ठावँ ठाँव राखे अति प्रीती।।
मूल पाठ
गुँह बोलाइ पाहरू प्रतीती। ठावँ ठाँव राखे अति प्रीती।।
आपु लखन पहिं बैठेउ जाई। कटि भाथी सर चाप चढ़ाई।।
स्रोत अभिलेख 2.9 · पुस्तक पृ. 417, 418
भावार्थ
मूल पाठ के बादगुहने विश्वासपात्र पहरेदारोंको बुलाकर अत्यन्त प्रेमसे जगह-जगह नियुक्त कर दिया। और आप कमरमें तरकस बाँधकर तथा धनुषपर बाण चढ़ाकर लक्ष्मणजीके पास जा बैठा॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 418 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 गुँह बोलाइ पाहरू प्रतीती। ठावँ ठाँव राखे अति प्रीती।।
English explanation
Guha summoned trustworthy guards and stationed them at various places with great affection.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| गुँह | निषादराज गुह ने | Guha, the Nishada chief |
| बोलाइ | बुलाकर | having summoned |
| पाहरू | पहरेदार | guards |
| प्रतीती | विश्वसनीय | trustworthy |
| ठावँ | जगह | place |
| ठाँव | जगह | place |
| राखे | तैनात किए | stationed |
| अति | बहुत | great |
| प्रीती | प्रेम से | with affection |
2 आपु लखन पहिं बैठेउ जाई। कटि भाथी सर चाप चढ़ाई।।
English explanation
Guha himself went and sat beside Lakshmana, with a quiver at his waist and an arrow set on his bow.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| आपु | स्वयं गुह | Guha himself |
| लखन | लक्ष्मण | Lakshmana |
| पहिं | के पास | beside |
| बैठेउ | बैठ गए | sat down |
| जाई | जाकर | having gone |
| कटि | कमर में | at the waist |
| भाथी | तरकस | quiver |
| सर | बाण | arrow |
| चाप | धनुष पर | on the bow |
| चढ़ाई | चढ़ाकर | having set |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.9
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 418
- सहायक विषय
- श्रीरामका शृङ्गवेरपुर पहुँचना, निषादके द्वारा सेवा
- मुद्रित पृष्ठ
- 417, 418
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।