अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
उठे लखनु प्रभु सोवत जानी। कहि सचिवहि सोवन मृदु बानी।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दफिर प्रभु श्रीरामचन्द्रजीको सोते जानकर लक्ष्मणजी उठे और कोमल वाणीसे मन्त्री सुमन्त्रजीको सोनेके लिये कहकर वहाँसे कुछ दूरपर धनुष-बाणसे सजकर, वीरासनसे बैठकर जागने (पहरा देने) लगे॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 417 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
उठे लखनु प्रभु सोवत जानी। कहि सचिवहि सोवन मृदु बानी।।
कछुक दूर सजि बान सरासन। जागन लगे बैठि बीरासन।।
स्रोत अभिलेख 2.9 · पुस्तक पृ. 417, 418
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 उठे लखनु प्रभु सोवत जानी। कहि सचिवहि सोवन मृदु बानी।।
English explanation
Knowing that Lord Rama was asleep, Lakshmana rose and gently told the minister Sumantra to sleep.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| उठे | उठ खड़े हुए | rose |
| लखनु | लक्ष्मण | Lakshmana, Rama’s brother |
| प्रभु | प्रभु राम को | Lord Rama |
| सोवत | सोते हुए | sleeping |
| जानी | जानकर | knowing |
| कहि | कहकर | having told |
| सचिवहि | मंत्री सुमंत्र से | to the minister Sumantra |
| सोवन | सोने के लिए | to sleep |
| मृदु | कोमल | gentle |
| बानी | वाणी में | in words |
2 कछुक दूर सजि बान सरासन। जागन लगे बैठि बीरासन।।
English explanation
A little distance away, Lakshmana equipped himself with bow and arrows, sat in a warrior’s posture, and began keeping watch.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कछुक | कुछ | a little |
| दूर | दूरी पर | distance away |
| सजि | सुसज्जित होकर | equipping himself with |
| बान | बाण | arrows |
| सरासन | धनुष | bow |
| जागन | जागकर पहरा देने | keeping awake on watch |
| लगे | लगे | began |
| बैठि | बैठकर | having sat |
| बीरासन | वीरों की बैठने की मुद्रा में | in a warrior’s seated posture |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.9
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 417
- सहायक विषय
- श्रीरामका शृङ्गवेरपुर पहुँचना, निषादके द्वारा सेवा
- मुद्रित पृष्ठ
- 417, 418
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।