अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
कौसिकादि मुनि सचिव समाजू। ग्यान अंबुनिधि आपुनु आजू।।
मूल पाठ
कौसिकादि मुनि सचिव समाजू। ग्यान अंबुनिधि आपुनु आजू।।
सिसु सेवक आयसु अनुगामी। जानि मोहि सिख देइअ स्वामी।।
स्रोत अभिलेख 2.293 · पुस्तक पृ. 588, 589
भावार्थ
मूल पाठ के बादविश्वामित्रजी आदि मुनियों और मन्त्रियोंका समाज है। और आजके दिन ज्ञानके समुद्र आप भी उपस्थित हैं। हे स्वामी! मुझे अपना बच्चा, सेवक और आज्ञानुसार चलनेवाला समझकर शिक्षा दीजिये॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 588 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 कौसिकादि मुनि सचिव समाजू। ग्यान अंबुनिधि आपुनु आजू।।
English explanation
Here are sages such as Vishvamitra and an assembly of ministers; today you yourself, an ocean of knowledge, are also present.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कौसिकादि | विश्वामित्र आदि | Vishvamitra and others |
| मुनि | मुनि | sages |
| सचिव | मंत्री | ministers |
| समाजू | सभा | assembly |
| ग्यान | ज्ञान | knowledge |
| अंबुनिधि | समुद्र | ocean |
| आपुनु | आप स्वयं | you yourself |
| आजू | आज | today |
2 सिसु सेवक आयसु अनुगामी। जानि मोहि सिख देइअ स्वामी।।
English explanation
My lord, regard me as a child, a servant, and a follower of your commands, and instruct me.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सिसु | बालक | child |
| सेवक | सेवक | servant |
| आयसु | आज्ञा | command |
| अनुगामी | अनुसरण करने वाला | one who follows |
| जानि | समझकर | regarding as |
| मोहि | मुझे | me |
| सिख | शिक्षा; मार्गदर्शन | instruction; guidance |
| देइअ | दीजिए | please give |
| स्वामी | हे स्वामी | my lord |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.293
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 588
- सहायक विषय
- जनक-वसिष्ठादि-संवाद, इन्द्रकी चिन्ता, सरस्वतीका इन्द्रको समझाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 588, 589
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।