अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
एहिं समाज थल बूझब राउर। मौन मलिन मैं बोलब बाउर।।
मूल पाठ
एहिं समाज थल बूझब राउर। मौन मलिन मैं बोलब बाउर।।
छोटे बदन कहउँ बड़ि बाता। छमब तात लखि बाम बिधाता।।
स्रोत अभिलेख 2.293 · पुस्तक पृ. 588, 589
भावार्थ
मूल पाठ के बादइस समाज और [पुण्य] स्थलमें आप [जैसे ज्ञानी और पूज्य] का पूछना! इसपर यदि मैं मौन रहता हूँ तो मलिन समझा जाऊँगा; और बोलना पागलपन होगा तथापि मैं छोटे मुँह बड़ी बात कहता हूँ। हे तात! विधाताको प्रतिकूल जानकर क्षमा कीजियेगा॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 588 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 एहिं समाज थल बूझब राउर। मौन मलिन मैं बोलब बाउर।।
English explanation
Your asking me in this assembly leaves me embarrassed: silence would reflect poorly on me, while speaking would be foolish.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| एहिं | इस | in this |
| समाज | सभा | assembly |
| थल | स्थान में | setting |
| बूझब | पूछना | asking |
| राउर | आपका | your |
| मौन | चुप रहने पर | if silent |
| मलिन | दोषयुक्त; लज्जित | discredited; embarrassed |
| मैं | मैं | I |
| बोलब | बोलना | speaking |
| बाउर | मूर्खतापूर्ण | foolish |
2 छोटे बदन कहउँ बड़ि बाता। छमब तात लखि बाम बिधाता।।
English explanation
With my little mouth I speak of great matters. Dear father, seeing that fate is against me, please forgive me.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| छोटे | छोटे | little |
| बदन | मुख से | with my mouth |
| कहउँ | मैं कहता हूँ | I say |
| बड़ि | बड़ी | great |
| बाता | बात | matter |
| छमब | क्षमा कीजिए | please forgive |
| तात | हे तात; पिता-समान आदरणीय | dear father; revered elder |
| लखि | देखकर; समझकर | seeing; recognizing |
| बाम | प्रतिकूल | adverse |
| बिधाता | विधाता; भाग्य का विधान करने वाला | the ordainer of fate |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.293
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 588
- सहायक विषय
- जनक-वसिष्ठादि-संवाद, इन्द्रकी चिन्ता, सरस्वतीका इन्द्रको समझाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 588, 589
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।