अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
आगम निगम प्रसिद्ध पुराना। सेवाधरमु कठिन जगु जाना।।
मूल पाठ
आगम निगम प्रसिद्ध पुराना। सेवाधरमु कठिन जगु जाना।।
स्वामि धरम स्वारथहि बिरोधू। बैरु अंध प्रेमहि न प्रबोधू।।
स्रोत अभिलेख 2.293 · पुस्तक पृ. 588, 589
भावार्थ
मूल पाठ के बादवेद, शास्त्र और पुराणोंमें प्रसिद्ध है और जगत् जानता है कि सेवाधर्म बड़ा कठिन है। स्वामिधर्ममें (स्वामीके प्रति कर्तव्यपालनमें) और स्वार्थमें विरोध है (दोनों एक साथ नहीं निभ सकते)। वैर अंधा होता है और प्रेमको ज्ञान नहीं रहता [मैं स्वार्थवश कहूँगा या प्रेमवश, दोनोंमें ही भूल होनेका भय है]॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 589 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 आगम निगम प्रसिद्ध पुराना। सेवाधरमु कठिन जगु जाना।।
English explanation
It is proclaimed in the Agamas, Vedas, and Puranas, and the world knows that the duty of service is difficult.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| आगम | आगम शास्त्र | Agama scriptures |
| निगम | वेद | Vedas |
| प्रसिद्ध | प्रसिद्ध; घोषित | well known; proclaimed |
| पुराना | पुराणों में | in the Puranas |
| सेवाधरमु | सेवा का धर्म | the duty of service |
| कठिन | कठिन | difficult |
| जगु | संसार | the world |
| जाना | जानता है | knows |
2 स्वामि धरम स्वारथहि बिरोधू। बैरु अंध प्रेमहि न प्रबोधू।।
English explanation
Duty toward one’s master conflicts with self-interest. Enmity is blind, and love lacks discerning judgment.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| स्वामि | स्वामी के प्रति | toward one’s master |
| धरम | धर्म; कर्तव्य | duty |
| स्वारथहि | स्वार्थ से | with self-interest |
| बिरोधू | विरोध | conflict |
| बैरु | वैर | enmity |
| अंध | अंधा | blind |
| प्रेमहि | प्रेम में; प्रेम को | in love; for love |
| न | नहीं | not |
| प्रबोधू | विवेकपूर्ण समझ | discerning understanding |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.293
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 589
- सहायक विषय
- जनक-वसिष्ठादि-संवाद, इन्द्रकी चिन्ता, सरस्वतीका इन्द्रको समझाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 588, 589
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।