अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
कोप समाजु साजि सबु सोई। राजु करत निज कुमति बिगोई।।
मूल पाठ
कोप समाजु साजि सबु सोई। राजु करत निज कुमति बिगोई।।
राउर नगर कोलाहलु होई। यह कुचालि कछु जान न कोई।।
स्रोत अभिलेख 2.23 · पुस्तक पृ. 362, 363
भावार्थ
मूल पाठ के बादकैकेयी कोपका सब साज सजकर [कोपभवनमें] जा सोयी। राज्य करती हुई वह अपनी दुष्ट बुद्धिसे नष्ट हो गयी। राजमहल और नगरमें धूम-धाम मच रही है। इस कुचालको कोई कुछ नहीं जानता॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 362 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 कोप समाजु साजि सबु सोई। राजु करत निज कुमति बिगोई।।
English explanation
Having arranged all the outward signs of anger, she lay asleep; while enjoying royal privilege, she brought ruin upon herself through her own misguided thinking.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कोप | क्रोध का | of anger |
| समाजु | साज-सामान | outward display and accessories |
| साजि | सजाकर | having arranged |
| सबु | सब | all |
| सोई | सो रही थी | lay asleep |
| राजु | राजसुख | royal privilege |
| करत | भोगते हुए | while enjoying |
| निज | अपनी | her own |
| कुमति | दुर्बुद्धि से | through misguided thinking |
| बिगोई | अपना अहित किया | ruined herself |
2 राउर नगर कोलाहलु होई। यह कुचालि कछु जान न कोई।।
English explanation
The palace and city were abuzz; no one knew anything of this wicked intrigue.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राउर | राजमहल में | in the royal palace |
| नगर | नगर में | in the city |
| कोलाहलु | कोलाहल | bustle and clamour |
| होई | हो रहा था | was occurring |
| यह | इस | this |
| कुचालि | दुष्ट चाल को | wicked intrigue |
| कछु | कुछ भी | anything |
| जान | जानता था | knew |
| न | नहीं | not |
| कोई | कोई | anyone |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.23
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 362
- सहायक विषय
- कैकेयीका कोपभवनमें जाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 362, 363
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।