अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
बिपति बीजु बरषा रितु चेरी। भुइँ भइ कुमति कैकेई केरी।।
मूल पाठ
बिपति बीजु बरषा रितु चेरी। भुइँ भइ कुमति कैकेई केरी।।
पाइ कपट जलु अंकुर जामा। बर दोउ दल दुख फल परिनामा।।
स्रोत अभिलेख 2.23 · पुस्तक पृ. 362, 363
भावार्थ
मूल पाठ के बादविपत्ति (कलह) बीज है, दासी वर्षा-ऋतु है, कैकेयीकी कुबुद्धि [उस बीजके बोनेके लिये] जमीन हो गयी। उसमें कपटरूपी जल पाकर अङ्कुर फूट निकला। दोनों वरदान उस अङ्कुरके दो पत्ते हैं और अन्तमें इसके दु:खरूपी फल होगा॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 362 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 बिपति बीजु बरषा रितु चेरी। भुइँ भइ कुमति कैकेई केरी।।
English explanation
Calamity was the seed, the maid Manthara the rainy season, and Kaikeyi’s misguided thinking became the soil.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बिपति | विपत्ति | calamity |
| बीजु | बीज | seed |
| बरषा | वर्षा | rainy |
| रितु | ऋतु | season |
| चेरी | दासी मंथरा | the maid Manthara |
| भुइँ | भूमि | soil |
| भइ | बनी | became |
| कुमति | दुर्बुद्धि | misguided thinking |
| कैकेई | कैकेयी | Kaikeyi, the queen |
| केरी | की | belonging to |
2 पाइ कपट जलु अंकुर जामा। बर दोउ दल दुख फल परिनामा।।
English explanation
Watered by deceit, the sprout grew; the two boons became its two leaves, and sorrow was its eventual fruit.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पाइ | पाकर | having received |
| कपट | कपट का | of deceit |
| जलु | जल | water |
| अंकुर | अंकुर | sprout |
| जामा | उगा | sprouted |
| बर | वरदान | boons |
| दोउ | दोनों | both |
| दल | पत्ते | leaves |
| दुख | दुख | sorrow |
| फल | फल | fruit |
| परिनामा | अंतिम परिणाम में | in the final outcome |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.23
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 362
- सहायक विषय
- कैकेयीका कोपभवनमें जाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 362, 363
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।