अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
कोउ कह रहन कहिअ नहिं काहू। को न चहइ जग जीवन लाहू।।
मूल पाठ
कोउ कह रहन कहिअ नहिं काहू। को न चहइ जग जीवन लाहू।।
स्रोत अभिलेख 2.185 · पुस्तक पृ. 496, 497
भावार्थ
मूल पाठ के बादकोई-कोई कहते हैं—रहनेके लिये किसीको भी मत कहो, जगत्में जीवनका लाभ कौन नहीं चाहता?॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 497 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 कोउ कह रहन कहिअ नहिं काहू। को न चहइ जग जीवन लाहू।।
English explanation
Someone says, ‘Do not tell anyone to remain behind. Who in this world does not desire life’s true gain?’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कोउ | कोई | someone |
| कह | कहता है | says |
| रहन | रुकने के लिए | to remain behind |
| कहिअ | कहा जाए | should be told |
| नहिं | नहीं | not |
| काहू | किसी को | to anyone |
| को | कौन | who |
| न | नहीं | not |
| चहइ | चाहता है | desires |
| जग | संसार में | in the world |
| जीवन | जीवन का | of life |
| लाहू | लाभ; सार्थक फल | gain; fulfillment |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.185
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 497
- सहायक विषय
- अयोध्यावासियोंसहित श्रीभरत-शत्रुघ्न आदिका वनगमन
- मुद्रित पृष्ठ
- 496, 497
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।