अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
कैकई जठर जनमि जग माहीं। यह मोहि कहँ कछु अनुचित नाहीं।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दकैकेयीके पेटसे जगत्में जन्म लेकर यह मेरे लिये कुछ भी अनुचित नहीं है। मेरी सब बात तो विधाताने ही बना दी है। [फिर] उसमें प्रजा और पंच (आप लोग) क्यों सहायता कर रहे हैं?॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 493 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
कैकई जठर जनमि जग माहीं। यह मोहि कहँ कछु अनुचित नाहीं।।
मोरि बात सब बिधिहिं बनाई। प्रजा पाँच कत करहु सहाई।।
स्रोत अभिलेख 2.18 · पुस्तक पृ. 492, 493
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 कैकई जठर जनमि जग माहीं। यह मोहि कहँ कछु अनुचित नाहीं।।
English explanation
Having been born into this world from Kaikeyi’s womb, none of this is unfitting for me.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कैकई | कैकेयी के | Kaikeyi’s |
| जठर | गर्भ से | from the womb |
| जनमि | जन्म लेकर | having been born |
| जग | संसार | the world |
| माहीं | में | in |
| यह | यह सब | all this |
| मोहि | मेरे | me |
| कहँ | लिए | for |
| कछु | कुछ भी | at all |
| अनुचित | अनुपयुक्त | unfitting |
| नाहीं | नहीं है | is not |
2 मोरि बात सब बिधिहिं बनाई। प्रजा पाँच कत करहु सहाई।।
English explanation
Fate has already arranged my whole affair! People and council elders, why are you helping it along?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मोरि | मेरी | my |
| बात | स्थिति या मामला | affair or situation |
| सब | सारा | entire |
| बिधिहिं | विधाता ने ही | fate itself |
| बनाई | बना दी | arranged |
| प्रजा | हे प्रजाजन | O people |
| पाँच | हे पंचों, समाज के प्रतिनिधियों | O council elders |
| कत | क्यों | why |
| करहु | करते हो | do you provide |
| सहाई | सहायता | help |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.18
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 493
- सहायक विषय
- वसिष्ठ-भरत-संवाद, श्रीरामजीको लानेके लिये चित्रकूट जानेकी तैयारी
- मुद्रित पृष्ठ
- 492, 493
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।