अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
कैकइ सुअन जोगु जग जोई। चतुर बिरंचि दीन्ह मोहि सोई।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दकैकेयीके लड़केके लिये संसारमें जो कुछ योग्य था, चतुर विधाताने मुझे वही दिया। पर 'दशरथजीका पुत्र और 'रामका छोटा भाई होनेकी बड़ाई मुझे विधाताने व्यर्थ ही दी॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 493 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
कैकइ सुअन जोगु जग जोई। चतुर बिरंचि दीन्ह मोहि सोई।।
दसरथ तनय राम लघु भाई। दीन्हि मोहि बिधि बादि बड़ाई।।
स्रोत अभिलेख 2.181 · पुस्तक पृ. 493, 494
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 कैकइ सुअन जोगु जग जोई। चतुर बिरंचि दीन्ह मोहि सोई।।
English explanation
AI draft: Clever Brahma gave me whatever befitted a son of Kaikeyi in this world.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कैकइ | कैकेयी का | of Kaikeyi, Bharata’s mother |
| सुअन | पुत्र | son |
| जोगु | योग्य; उपयुक्त | befitting |
| जग | संसार में | in the world |
| जोई | जो कुछ | whatever |
| चतुर | चतुर | clever |
| बिरंचि | सृष्टिकर्ता ब्रह्मा ने | Brahma, the creator |
| दीन्ह | दिया | gave |
| मोहि | मुझे, भरत को | to me, Bharata |
| सोई | वही | that very thing |
2 दसरथ तनय राम लघु भाई। दीन्हि मोहि बिधि बादि बड़ाई।।
English explanation
The creator bestowed on me, undeservedly, the honor of being Dasharatha’s son and Rama’s younger brother.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| दसरथ | राजा दशरथ का | of King Dasharatha |
| तनय | पुत्र | son |
| राम | राम का | of Rama |
| लघु | छोटा | younger |
| भाई | भाई | brother |
| दीन्हि | दी | bestowed |
| मोहि | मुझे | on me |
| बिधि | विधाता ने | the creator |
| बादि | व्यर्थ; बिना योग्यता के | vainly; undeservedly |
| बड़ाई | प्रतिष्ठा; गौरव | honor; distinction |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.181
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 493
- सहायक विषय
- वसिष्ठ-भरत-संवाद, श्रीरामजीको लानेके लिये चित्रकूट जानेकी तैयारी
- मुद्रित पृष्ठ
- 493, 494
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।