अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
काहुहि दोसु देहु जनि ताता। भा मोहि सब बिधि बाम बिधाता।।
मूल पाठ
काहुहि दोसु देहु जनि ताता। भा मोहि सब बिधि बाम बिधाता।।
जो एतेहुँ दुख मोहि जिआवा। अजहुँ को जानइ का तेहि भावा।।
स्रोत अभिलेख 2.165 · पुस्तक पृ. 480, 481
भावार्थ
मूल पाठ के बादहे तात! किसीको दोष मत दो। विधाता मुझको सब प्रकारसे उलटा हो गया है, जो इतने दु:खपर भी मुझे जिला रहा है। अब भी कौन जानता है, उसे क्या भा रहा है?॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 481 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 काहुहि दोसु देहु जनि ताता। भा मोहि सब बिधि बाम बिधाता।।
English explanation
‘Dear son, blame no one. The disposer of fate has become adverse to me in every way.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| काहुहि | किसी को | to anyone |
| दोसु | दोष | blame |
| देहु | दो | assign |
| जनि | मत | do not |
| ताता | हे प्रिय पुत्र | dear son |
| भा | हो गया | has become |
| मोहि | मेरे प्रति | toward me |
| सब | सब | every |
| बिधि | प्रकार से | in ways |
| बाम | प्रतिकूल | adverse |
| बिधाता | विधाता; भाग्य का विधान करने वाला | the disposer of fate |
2 जो एतेहुँ दुख मोहि जिआवा। अजहुँ को जानइ का तेहि भावा।।
English explanation
‘He has kept me alive despite so much sorrow; who knows what he still has in mind!’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जो | जिसने | who |
| एतेहुँ | इतने भी; इतने के बावजूद | despite so much |
| दुख | दुःख में | sorrow |
| मोहि | मुझे | me |
| जिआवा | जीवित रखा | kept alive |
| अजहुँ | अब भी | even now; still |
| को | कौन | who |
| जानइ | जानता है | knows |
| का | क्या | what |
| तेहि | उसे; उस विधाता को | to him, the disposer of fate |
| भावा | भाता है; अभिप्रेत है | is pleasing; is intended |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.165
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 481
- सहायक विषय
- भरत-कौसल्या-संवाद और दशरथजीकी अन्त्येष्टि क्रिया
- मुद्रित पृष्ठ
- 480, 481
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