अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
कहि न सकत कछु चितवत ठाढ़े। मीनु दीन जनु जल तें काढ़े।।
मूल पाठ
कहि न सकत कछु चितवत ठाढ़े। मीनु दीन जनु जल तें काढ़े।।
सोचु हृदयँ बिधि का होनिहारा। सबु सुखु सुकृत सिरान हमारा।।
स्रोत अभिलेख 2.7 · पुस्तक पृ. 401, 402
भावार्थ
मूल पाठ के बादवे कुछ कह नहीं सकते, खड़े-खड़े देख रहे हैं। [ऐसे दीन हो रहे हैं] मानो जलसे निकाले जानेपर मछली दीन हो रही हो। हृदयमें यह सोच है कि हे विधाता! क्या होनेवाला है? क्या हमारा सब सुख और पुण्य पूरा हो गया?॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 401 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 कहि न सकत कछु चितवत ठाढ़े। मीनु दीन जनु जल तें काढ़े।।
English explanation
Unable to say anything, he stood gazing, like a helpless fish taken out of water.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कहि | कह | say |
| न | नहीं | not |
| सकत | सकते | could |
| कछु | कुछ भी | anything |
| चितवत | देखते हुए | gazing |
| ठाढ़े | खड़े थे | stood |
| मीनु | मछली | a fish |
| दीन | असहाय, बेहाल | helpless and distressed |
| जनु | मानो | as though |
| जल | पानी | water |
| तें | से | from |
| काढ़े | बाहर निकाली गई | taken out |
2 सोचु हृदयँ बिधि का होनिहारा। सबु सुखु सुकृत सिरान हमारा।।
English explanation
Anxiety filled his heart: ‘O Fate, what is going to happen? All my happiness and accumulated merit have come to an end.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सोचु | चिंता | anxiety |
| हृदयँ | हृदय में | in the heart |
| बिधि | हे विधाता | O Fate |
| का | क्या | what |
| होनिहारा | होने वाला है | is going to happen |
| सबु | सारा | all |
| सुखु | सुख | happiness |
| सुकृत | पुण्य, शुभ कर्मों का फल | merit from good deeds |
| सिरान | समाप्त हो गया | has come to an end |
| हमारा | हमारा | my |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.7
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 401
- सहायक विषय
- श्रीराम-कौसल्या-सीता-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 401, 402
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।