अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
कहहिं भरतु मुनि कहा सो कीन्हे। फलु जग जीवन्ह अभिमत दीन्हे।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दभरतजी कहने लगे—मुनिने जो कहा, वह करनेसे जगत्भरके जीवोंको उनकी इच्छित वस्तु देनेका फल होगा। [चौदह वर्षकी कोई अवधि नहीं,] मैं जन्मभर वनमें वास करूँगा। मेरे लिये इससे बढ़कर और कोई सुख नहीं है॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 557 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
कहहिं भरतु मुनि कहा सो कीन्हे। फलु जग जीवन्ह अभिमत दीन्हे।।
कानन करउँ जनम भरि बासू। एहिं तें अधिक न मोर सुपासू।।
स्रोत अभिलेख 2.256 · पुस्तक पृ. 557, 558
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 कहहिं भरतु मुनि कहा सो कीन्हे। फलु जग जीवन्ह अभिमत दीन्हे।।
English explanation
Bharata says: carrying out what the sage has proposed would give the beings of the world their desired result.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कहहिं | कहते हैं | says |
| भरतु | भरत, राम के भाई | Bharata, Rama’s brother |
| मुनि | मुनि वसिष्ठ ने | the sage Vasishtha |
| कहा | जो कहा, प्रस्तावित किया | what was said or proposed |
| सो | वही | that very thing |
| कीन्हे | करने से | by carrying it out |
| फलु | फल, परिणाम | fruit; result |
| जग | संसार के | of the world |
| जीवन्ह | जीवों को | to living beings |
| अभिमत | मनचाहा | desired |
| दीन्हे | दे दिया जाएगा | would be bestowed |
2 कानन करउँ जनम भरि बासू। एहिं तें अधिक न मोर सुपासू।।
English explanation
Let me dwell in the forest all my life; there is no better opportunity for me than this.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कानन | वन में | in the forest |
| करउँ | मैं करूँ | let me undertake |
| जनम | जीवन | life |
| भरि | भर, पूरे समय | throughout |
| बासू | निवास | residence; dwelling |
| एहिं | इससे | this |
| तें | से | than |
| अधिक | बढ़कर, श्रेष्ठ | greater; better |
| न | नहीं | not |
| मोर | मेरे लिए | for me |
| सुपासू | अच्छा अवसर, अनुकूल स्थिति | favorable opportunity |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.256
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 557
- सहायक विषय
- श्रीवसिष्ठजीका भाषण
- मुद्रित पृष्ठ
- 557, 558
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।