अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
कहहिं झूठि फुरि बात बनाई। ते प्रिय तुम्हहि करुइ मैं माई।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दजो झूठी-सच्ची बातें बनाकर कहते हैं, हे माई! वे ही तुम्हें प्रिय हैं और मैं कड़वी लगती हूँ! अब मैं भी ठकुरसुहाती (मुँहदेखी) कहा करूँगी। नहीं तो दिन-रात चुप रहूँगी॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 356 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
कहहिं झूठि फुरि बात बनाई। ते प्रिय तुम्हहि करुइ मैं माई।।
हमहुँ कहबि अब ठकुरसोहाती। नाहिं त मौन रहब दिनु राती।।
स्रोत अभिलेख 2.16 · पुस्तक पृ. 356, 357
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 कहहिं झूठि फुरि बात बनाई। ते प्रिय तुम्हहि करुइ मैं माई।।
English explanation
Those who present falsehood as truth are dear to you; mother, I seem bitter to you.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कहहिं | कहते हैं | say |
| झूठि | झूठी | false |
| फुरि | सच्ची | true |
| बात | बात | statement |
| बनाई | बनाकर | presenting as |
| ते | वे लोग | those people |
| प्रिय | प्रिय | dear |
| तुम्हहि | तुम्हें | to you |
| करुइ | कड़वी लगने वाली | bitter; disagreeable |
| मैं | मैं | I |
| माई | हे माँ | O mother |
2 हमहुँ कहबि अब ठकुरसोहाती। नाहिं त मौन रहब दिनु राती।।
English explanation
Now I too shall say only what pleases you; otherwise I shall remain silent day and night.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| हमहुँ | मैं भी | I too |
| कहबि | कहूँगी | shall say |
| अब | अब | now |
| ठकुरसोहाती | स्वामी को सुहाने वाली चापलूसी की बात | flattery pleasing to one's master |
| नाहिं | नहीं | not |
| त | तो | then; otherwise |
| मौन | चुप | silent |
| रहब | रहूँगी | shall remain |
| दिनु | दिन | day |
| राती | रात | night |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.16
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 356
- सहायक विषय
- सरस्वतीका मन्थराकी बुद्धि फेरना, कैकेयी-मन्थरा-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 356, 357
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