अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
कहत सप्रेम नाइ महि माथा। भरत प्रनाम करत रघुनाथा।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दलक्ष्मणजीने प्रेमसहित पृथ्वीपर मस्तक नवाकर कहा—हे रघुनाथजी ! भरतजी प्रणाम कर रहे हैं। यह सुनते ही श्रीरघुनाथजी प्रेममें अधीर होकर उठे। कहीं वस्त्र गिरा, कहीं तरकस, कहीं धनुष और कहीं बाण॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 544 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
कहत सप्रेम नाइ महि माथा। भरत प्रनाम करत रघुनाथा।।
उठे रामु सुनि पेम अधीरा। कहुँ पट कहुँ निषंग धनु तीरा।।
स्रोत अभिलेख 2.24 · पुस्तक पृ. 543, 544
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 कहत सप्रेम नाइ महि माथा। भरत प्रनाम करत रघुनाथा।।
English explanation
Bowing his head to the ground, Lakshmana says lovingly, “O Rama, lord of Raghu’s lineage, Bharata is offering his reverence.”
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कहत | कहते हैं | says |
| सप्रेम | प्रेमपूर्वक | lovingly |
| नाइ | झुकाकर | bowing |
| महि | धरती पर | to the ground |
| माथा | माथा | his head |
| भरत | भरत | Bharata, Rama’s brother |
| प्रनाम | प्रणाम | reverential homage |
| करत | कर रहे हैं | is offering |
| रघुनाथा | हे रघुनाथ राम | O Rama, lord of Raghu’s lineage |
2 उठे रामु सुनि पेम अधीरा। कहुँ पट कहुँ निषंग धनु तीरा।।
English explanation
Hearing this, Rama sprang up, overcome with love; his garment lay in one place, his quiver in another, and his bow and arrows elsewhere.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| उठे | उठ पड़े | sprang up |
| रामु | राम | Rama |
| सुनि | सुनकर | hearing this |
| पेम | प्रेम से | with love |
| अधीरा | अधीर | overcome and restless |
| कहुँ | कहीं | in one place |
| पट | वस्त्र | garment |
| कहुँ | कहीं | in another place |
| निषंग | तरकश | quiver |
| धनु | धनुष | bow |
| तीरा | बाण | arrows |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.24
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 544
- सहायक विषय
- भरतजीका मन्दाकिनी-स्नान, चित्रकूटमें पहुँचना, भरतादि सबका परस्पर मिलाप, पिताका शोक और श्राद्ध
- मुद्रित पृष्ठ
- 543, 544
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।