अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
कहउँ सुभाउ सत्य सिव साखी। भरत भूमि रह राउरि राखी।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दहे भरत! मैं स्वभावसे ही सत्य कहता हूँ, शिवजी साक्षी हैं, यह पृथ्वी तुम्हारी ही रखी रह रही है। हे तात! तुम व्यर्थ कुतर्क न करो। वैर और प्रेम छिपाये नहीं छिपते॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 563 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
कहउँ सुभाउ सत्य सिव साखी। भरत भूमि रह राउरि राखी।।
तात कुतरक करहु जनि जाएँ। बैर पेम नहि दुरइ दुराएँ।।
स्रोत अभिलेख 2.264 · पुस्तक पृ. 563, 564
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 कहउँ सुभाउ सत्य सिव साखी। भरत भूमि रह राउरि राखी।।
English explanation
I speak truthfully of my disposition, with Shiva as witness. Bharata, the kingdom has remained safe under your protection.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कहउँ | मैं कहता हूँ | I say |
| सुभाउ | अपना स्वभाव | my disposition |
| सत्य | सच | truthfully |
| सिव | भगवान शिव | Lord Shiva |
| साखी | साक्षी हैं | is witness |
| भरत | हे भरत, राम के भाई | Bharata, Rama’s brother, addressed here |
| भूमि | राज्यभूमि | the kingdom |
| रह | रही है | has remained |
| राउरि | तुम्हारे द्वारा | by you |
| राखी | सुरक्षित रखी हुई | kept safe |
2 तात कुतरक करहु जनि जाएँ। बैर पेम नहि दुरइ दुराएँ।।
English explanation
Dear brother, do not indulge in futile arguments. Enmity and love cannot be hidden, even when one tries to conceal them.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तात | प्रिय भाई | dear brother |
| कुतरक | खोटे तर्क | specious arguments |
| करहु | करो | make |
| जनि | मत | do not |
| जाएँ | व्यर्थ | in vain |
| बैर | शत्रुता | enmity |
| पेम | प्रेम | love |
| नहि | नहीं | not |
| दुरइ | छिपता है | remains hidden |
| दुराएँ | छिपाने पर भी | even when concealed |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.264
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 563
- सहायक विषय
- श्रीराम-भरतादिका संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 563, 564
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।