अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
कहइ करहु किन कोटि उपाया। इहाँ न लागिहि राउरि माया।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्द[कैकेयी कहती है—] आप करोड़ों उपाय क्यों न करें, यहाँ आपकी माया (चालबाजी) नहीं लगेगी। या तो मैंने जो माँगा है सो दीजिये, नहीं तो 'नाहीं करके अपयश लीजिये। मुझे बहुत प्रपञ्च (बखेड़े) नहीं सुहाते॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 371 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
कहइ करहु किन कोटि उपाया। इहाँ न लागिहि राउरि माया।।
देहु कि लेहु अजसु करि नाहीं। मोहि न बहुत प्रपंच सोहाहीं।
स्रोत अभिलेख 2.33 · पुस्तक पृ. 371, 371
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 कहइ करहु किन कोटि उपाया। इहाँ न लागिहि राउरि माया।।
English explanation
She says, “Try millions of devices if you wish; your guile will not work here.”
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कहइ | वह कहती है | she says |
| करहु | करो | try; do |
| किन | चाहे; क्यों न | even if; if you wish |
| कोटि | करोड़ों | millions of |
| उपाया | उपाय | devices; stratagems |
| इहाँ | यहाँ | here |
| न | नहीं | not |
| लागिहि | चलेगी; असर करेगी | will work |
| राउरि | आपकी | your |
| माया | छलपूर्ण चाल | guile |
2 देहु कि लेहु अजसु करि नाहीं। मोहि न बहुत प्रपंच सोहाहीं।
English explanation
Either grant the requested boons or refuse and incur disgrace. I do not like all this maneuvering.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| देहु | दो; वर पूरे करो | grant the boons |
| कि | या | or |
| लेहु | लो; स्वीकार करो | take; incur |
| अजसु | अपयश | disgrace |
| करि | करके | by making |
| नाहीं | इनकार | a refusal |
| मोहि | मुझे | to me |
| न | नहीं | not |
| बहुत | बहुत; इतने | so much |
| प्रपंच | प्रपंच; छलपूर्ण बातें | maneuvering; deceptive talk |
| सोहाहीं | अच्छे लगते | are pleasing |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.33
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 371
- सहायक विषय
- दशरथ-कैकेयी-संवाद और दशरथ-शोक, सुमन्त्रका महलमें जाना और वहाँसे लौटकर श्रीरामजीको महलमें भेजना
- मुद्रित पृष्ठ
- 371, 371
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