अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
करुनामय मृदु राम सुभाऊ। प्रथम दीख दुखु सुना न काऊ।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दश्रीरामचन्द्रजीका स्वभाव कोमल और करुणामय है। उन्होंने [अपने जीवनमें] पहली बार यह दु:ख देखा; इससे पहले कभी उन्होंने दु:ख सुना भी न था। तो भी समयका विचार करके हृदयमें धीरज धरकर उन्होंने मीठे वचनोंसे माता कैकेयीसे पूछा—॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 377 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
करुनामय मृदु राम सुभाऊ। प्रथम दीख दुखु सुना न काऊ।।
तदपि धीर धरि समउ बिचारी। पूँछी मधुर बचन महतारी।।
स्रोत अभिलेख 2.4 · पुस्तक पृ. 377, 377
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 करुनामय मृदु राम सुभाऊ। प्रथम दीख दुखु सुना न काऊ।।
English explanation
Rama’s nature is compassionate and gentle. For the first time he saw such sorrow, which he had never even heard of before.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| करुनामय | करुणा से भरा | full of compassion |
| मृदु | कोमल | gentle |
| राम | राम का | Rama’s |
| सुभाऊ | स्वभाव | nature |
| प्रथम | पहली बार | for the first time |
| दीख | देखा | saw |
| दुखु | दुःख | sorrow |
| सुना | सुना था | had heard of |
| न | नहीं | not |
| काऊ | कभी | ever |
2 तदपि धीर धरि समउ बिचारी। पूँछी मधुर बचन महतारी।।
English explanation
Nevertheless, maintaining composure and considering the circumstances, Rama addressed his mother Kaikeyi with gentle words.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तदपि | फिर भी | nevertheless |
| धीर | धैर्य | composure |
| धरि | धारण करके | maintaining |
| समउ | समय और परिस्थिति | the circumstances |
| बिचारी | विचार करके | having considered |
| पूँछी | पूछा | asked |
| मधुर | मधुर | gentle |
| बचन | वचनों से | with words |
| महतारी | माता से | his mother |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.4
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 377
- सहायक विषय
- श्रीराम-कैकेयी-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 377, 377
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।