अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
करि बिचारु मन दीन्ही ठीका। राम रजायस आपन नीका।।
मूल पाठ
करि बिचारु मन दीन्ही ठीका। राम रजायस आपन नीका।।
निज पन तजि राखेउ पनु मोरा। छोहु सनेहु कीन्ह नहिं थोरा।।
स्रोत अभिलेख 2.266 · पुस्तक पृ. 565, 566
भावार्थ
मूल पाठ के बादसब तरहसे विचार करके अन्तमें उन्होंने मनमें यही निश्चय किया कि श्रीरामजीकी आज्ञामें ही अपना कल्याण है। उन्होंने अपना प्रण छोड़कर मेरा प्रण रखा। यह कुछ कम कृपा और स्नेह नहीं किया (अर्थात् अत्यन्त ही अनुग्रह और स्नेह किया)॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 565 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 करि बिचारु मन दीन्ही ठीका। राम रजायस आपन नीका।।
English explanation
After reflection, he resolved in his mind: obeying Rama’s royal command is best for me.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| करि | करके | having made |
| बिचारु | विचार | reflection |
| मन | मन में | in his mind |
| दीन्ही | किया; ठहराया | made; settled |
| ठीका | दृढ़ निश्चय | a firm resolution |
| राम | राम की | Rama’s |
| रजायस | राजाज्ञा | royal command |
| आपन | अपने लिए | for oneself |
| नीका | अच्छा; हितकारी | good; beneficial |
2 निज पन तजि राखेउ पनु मोरा। छोहु सनेहु कीन्ह नहिं थोरा।।
English explanation
He set aside his own pledge to uphold mine, and showed me no small tenderness and love.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| निज | अपनी | his own |
| पन | प्रतिज्ञा | pledge |
| तजि | छोड़कर | setting aside |
| राखेउ | निभाई; सुरक्षित रखी | upheld |
| पनु | प्रतिज्ञा | pledge |
| मोरा | मेरी | mine |
| छोहु | ममता; करुण स्नेह | tenderness; compassion |
| सनेहु | प्रेम | love |
| कीन्ह | किया | showed |
| नहिं | नहीं | not |
| थोरा | थोड़ा | little |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.266
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 565
- सहायक विषय
- श्रीराम-भरतादिका संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 565, 566
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