अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
करि केहरि बन जाइ न जोई। हम सँग चलहि जो आयसु होई।।
मूल पाठ
करि केहरि बन जाइ न जोई। हम सँग चलहि जो आयसु होई।।
जाब जहाँ लगि तहँ पहुँचाई। फिरब बहोरि तुम्हहि सिरु नाई।।
स्रोत अभिलेख 2.112 · पुस्तक पृ. 436, 437
भावार्थ
मूल पाठ के बादहाथी और सिंहोंसे भरा यह भयानक वन देखातक नहीं जाता। यदि आज्ञा हो तो हम साथ चलें। आप जहाँतक जायँगे वहाँतक पहुँचाकर, फिर आपको प्रणाम करके हम लौट आवेंगे॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 437 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 करि केहरि बन जाइ न जोई। हम सँग चलहि जो आयसु होई।।
English explanation
The forest with its elephants and lions is fearsome even to look upon. If you permit, we will accompany you.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| करि | हाथी | elephants |
| केहरि | सिंह | lions |
| बन | वन | forest |
| जाइ | जा सकता | can be |
| न | नहीं | not |
| जोई | देखा | looked upon |
| हम | हम | we |
| सँग | साथ | along with you |
| चलहि | चलें | may accompany |
| जो | यदि | if |
| आयसु | अनुमति | permission |
| होई | हो | is given |
2 जाब जहाँ लगि तहँ पहुँचाई। फिरब बहोरि तुम्हहि सिरु नाई।।
English explanation
We will escort you as far as you go, then bow our heads to you and return.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जाब | तुम जाओगे | you will go |
| जहाँ | जहाँ | wherever |
| लगि | तक | as far as |
| तहँ | वहाँ | there |
| पहुँचाई | तुम्हें पहुँचाकर | having escorted you |
| फिरब | हम लौटेंगे | we will return |
| बहोरि | फिर | then |
| तुम्हहि | तुम्हें | to you |
| सिरु | सिर | our heads |
| नाई | झुकाकर | having bowed |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.112
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 437
- सहायक विषय
- यमुनाको प्रणाम, वनवासियोंका प्रेम
- मुद्रित पृष्ठ
- 436, 437
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।