अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
करत मनोरथ जस जियँ जाके। जाहिं सनेह सुराँ सब छाके।।
मूल पाठ
करत मनोरथ जस जियँ जाके। जाहिं सनेह सुराँ सब छाके।।
सिथिल अंग पग मग डगि डोलहिं। बिहबल बचन पेम बस बोलहिं।।
स्रोत अभिलेख 2.225 · पुस्तक पृ. 530, 531
भावार्थ
मूल पाठ के बादजिसके जीमें जैसा है, वह वैसा ही मनोरथ करता है। सब स्नेहरूपी मदिरासे छके (प्रेममें मतवाले हुए) चले जा रहे हैं। अङ्ग शिथिल हैं, रास्तेमें पैर डगमगा रहे हैं और प्रेमवश विह्वल वचन बोल रहे हैं॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 530 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 करत मनोरथ जस जियँ जाके। जाहिं सनेह सुराँ सब छाके।।
English explanation
Each proceeds imagining the fulfillment of whatever wish lies in their heart; all are intoxicated with the wine of affection.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| करत | करते हुए | forming |
| मनोरथ | मन की अभिलाषाएँ | heartfelt wishes |
| जस | जैसा | whatever kind |
| जियँ | हृदय में | in the heart |
| जाके | जिसके | of each person |
| जाहिं | चले जाते हैं | proceed |
| सनेह | स्नेह की | of affection |
| सुराँ | मदिरा | wine |
| सब | सभी | all |
| छाके | मतवाले | intoxicated |
2 सिथिल अंग पग मग डगि डोलहिं। बिहबल बचन पेम बस बोलहिं।।
English explanation
Their limbs are slack and their feet stagger on the road; overcome by love, they utter words of deep emotion.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सिथिल | शिथिल | slack |
| अंग | अंग | limbs |
| पग | पाँव | feet |
| मग | मार्ग में | on the road |
| डगि | डगमगाकर | staggering |
| डोलहिं | डोलते हैं | sway |
| बिहबल | भावों से व्याकुल | emotionally overwhelmed |
| बचन | वचन | words |
| पेम | प्रेम के | of love |
| बस | वश में | under the sway |
| बोलहिं | बोलते हैं | speak |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.225
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 530
- सहायक विषय
- भरतजी चित्रकूटके मार्गमें
- मुद्रित पृष्ठ
- 530, 531
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।