अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
कपट कुचालि सीवँ सुरराजू। पर अकाज प्रिय आपन काजू।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्ददेवराज इन्द्र कपट और कुचालकी सीमा है। उसे परायी हानि और अपना लाभ ही प्रिय है। इन्द्रकी रीति कौएके समान है। वह छली और मलिन-मन है, उसका कहीं किसीपर विश्वास नहीं है॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 596 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
कपट कुचालि सीवँ सुरराजू। पर अकाज प्रिय आपन काजू।।
काक समान पाकरिपु रीती। छली मलीन कतहुँ न प्रतीती।।
स्रोत अभिलेख 2.302 · पुस्तक पृ. 596, 597
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 कपट कुचालि सीवँ सुरराजू। पर अकाज प्रिय आपन काजू।।
English explanation
AI-generated interpretive draft: Indra, king of the gods, is the very limit of deceit and scheming; he delights in others’ harm and the advancement of his own interests.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कपट | छल | deceit |
| कुचालि | बुरी चालों की | of malicious schemes |
| सीवँ | सीमा; पराकाष्ठा | the limit; the extreme |
| सुरराजू | देवताओं के राजा इंद्र | Indra, king of the gods |
| पर | दूसरों का | others’ |
| अकाज | अहित; काम बिगड़ना | harm; frustration of interests |
| प्रिय | प्रिय है | is pleasing |
| आपन | अपना | his own |
| काजू | काम; स्वार्थ की सिद्धि | business; fulfillment of self-interest |
2 काक समान पाकरिपु रीती। छली मलीन कतहुँ न प्रतीती।।
English explanation
Indra, enemy of the demon Pāka, behaves like a crow. Deceitful and impure in mind, he is trusted nowhere.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| काक | कौआ | a crow |
| समान | के समान | like |
| पाकरिपु | पाक असुर के शत्रु इंद्र की | of Indra, enemy of the demon Pāka |
| रीती | चाल; आचरण | conduct; manner |
| छली | छल करने वाले | deceitful |
| मलीन | दूषित मन वाले | impure in mind |
| कतहुँ | कहीं भी | anywhere |
| न | नहीं | not |
| प्रतीती | विश्वास | trust |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.302
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 596
- सहायक विषय
- श्रीराम-भरत-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 596, 597
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।