अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
कपटी कायर कुमति कुजाती। लोक बेद बाहेर सब भाँती।।
मूल पाठ
कपटी कायर कुमति कुजाती। लोक बेद बाहेर सब भाँती।।
राम कीन्ह आपन जबही तें। भयउँ भुवन भूषन तबही तें।।
स्रोत अभिलेख 2.196 · पुस्तक पृ. 505, 506
भावार्थ
मूल पाठ के बादमैं कपटी, कायर, कुबुद्धि और कुजाति हूँ और लोक-वेद दोनोंसे सब प्रकारसे बाहर हूँ। पर जबसे श्रीरामचन्द्रजीने मुझे अपनाया है, तभीसे मैं विश्वका भूषण हो गया॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 505 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 कपटी कायर कुमति कुजाती। लोक बेद बाहेर सब भाँती।।
English explanation
I was deceitful, cowardly, ill-minded, and of low social birth, outside worldly and Vedic norms in every way.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कपटी | कपट करने वाला | deceitful |
| कायर | डरपोक | cowardly |
| कुमति | बुरी बुद्धि वाला | ill-minded |
| कुजाती | नीच मानी जाने वाली जाति का | of a caste regarded as low |
| लोक | लोक की मर्यादा | worldly social norms |
| बेद | वेद की मर्यादा | Vedic norms |
| बाहेर | से बाहर | outside |
| सब | सभी | every |
| भाँती | प्रकार से | way |
2 राम कीन्ह आपन जबही तें। भयउँ भुवन भूषन तबही तें।।
English explanation
From the very moment Rama accepted me as his own, I became an ornament of the world.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राम | भगवान राम ने | Rama |
| कीन्ह | बना लिया | made |
| आपन | अपना | his own |
| जबही | जिस क्षण से ही | from the very moment when |
| तें | से | from |
| भयउँ | मैं हो गया | I became |
| भुवन | संसार का | of the world |
| भूषन | आभूषण; शोभा | ornament; adornment |
| तबही | उसी क्षण से ही | from that very moment |
| तें | से | from |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.196
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 505
- सहायक विषय
- भरत-निषाद-मिलन और संवाद एवं भरतजीका तथा नगरवासियोंका प्रेम
- मुद्रित पृष्ठ
- 505, 506
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।