अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
कत सिख देइ हमहि कोउ माई। गालु करब केहि कर बलु पाई।।
मूल पाठ
कत सिख देइ हमहि कोउ माई। गालु करब केहि कर बलु पाई।।
रामहि छाड़ि कुसल केहि आजू। जेहि जनेसु देइ जुबराजू।।
स्रोत अभिलेख 2.14 · पुस्तक पृ. 354, 355
भावार्थ
मूल पाठ के बाद[वह कहने लगी—] हे माई! हमें कोई क्यों सीख देगा और मैं किसका बल पाकर गाल करूँगी (बढ़-बढ़कर बोलूँगी)। रामचन्द्रको छोड़कर आज और किसकी कुशल है, जिन्हें राजा युवराज-पद दे रहे हैं॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 354 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 कत सिख देइ हमहि कोउ माई। गालु करब केहि कर बलु पाई।।
English explanation
Mother, why would anyone lecture me? On whose support could I presume to boast?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कत | क्यों | why |
| सिख | सीख; उपदेश | advice; instruction |
| देइ | दे | would give |
| हमहि | हमें; मुझे | to me |
| कोउ | कोई | anyone |
| माई | हे माता | Mother |
| गालु | डींग; बढ़-बढ़कर बात | boasting; presumptuous talk |
| करब | मैं करूँगी | would I do |
| केहि | किसके | whose |
| कर | का | of |
| बलु | बल; सहारा | strength; support |
| पाई | पाकर | having obtained |
2 रामहि छाड़ि कुसल केहि आजू। जेहि जनेसु देइ जुबराजू।।
English explanation
Who besides Rama enjoys good fortune today—the one to whom the king is granting the position of crown prince?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| रामहि | राम को | Rama |
| छाड़ि | छोड़कर | apart from |
| कुसल | भलाई; कुशल | well-being; good fortune |
| केहि | किसका | whose |
| आजू | आज | today |
| जेहि | जिसे | to whom |
| जनेसु | राजा दशरथ | King Dasharatha |
| देइ | दे रहे हैं | is granting |
| जुबराजू | युवराज का पद | the position of crown prince |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.14
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 354
- सहायक विषय
- सरस्वतीका मन्थराकी बुद्धि फेरना, कैकेयी-मन्थरा-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 354, 355
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।