अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
एहि बिधि राउ मनहिं मन झाँखा। देखि कुभाँति कुमति मन माखा।।
मूल पाठ
एहि बिधि राउ मनहिं मन झाँखा। देखि कुभाँति कुमति मन माखा।।
भरतु कि राउर पूत न होहीं। आनेहु मोल बेसाहि कि मोही।।
स्रोत अभिलेख 2.3 · पुस्तक पृ. 368, 369
भावार्थ
मूल पाठ के बादइस प्रकार राजा मन-ही-मन झींख रहे हैं। राजाका ऐसा बुरा हाल देखकर दुर्बुद्धि कैकेयी मनमें बुरी तरहसे क्रोधित हुई। [और बोली—] क्या भरत आपके पुत्र नहीं हैं ? क्या मुझे आप दाम देकर खरीद लाये हैं? (क्या मैं आपकी विवाहिता पत्नी नहीं हूँ?)॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 368 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 एहि बिधि राउ मनहिं मन झाँखा। देखि कुभाँति कुमति मन माखा।।
English explanation
AI-draft interpretation: Thus the king grieved inwardly. Seeing his distressed condition, misguided Kaikeyi grew angry at heart.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| एहि | इस | this |
| बिधि | प्रकार | manner |
| राउ | राजा दशरथ | King Dasharatha |
| मनहिं | मन में ही | within his heart |
| मन | मन | heart |
| झाँखा | खिन्न हुए; पछताए | grieved; lamented |
| देखि | देखकर | seeing |
| कुभाँति | बुरी दशा | distressed condition |
| कुमति | दुर्बुद्धि कैकेयी | misguided Kaikeyi |
| मन | मन में | at heart |
| माखा | क्रुद्ध हुई | grew angry |
2 भरतु कि राउर पूत न होहीं। आनेहु मोल बेसाहि कि मोही।।
English explanation
Is Bharata not your son? Did you bring me here as someone purchased for a price?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भरतु | भरत, कैकेयी के पुत्र | Bharata, Kaikeyi’s son |
| कि | क्या | is it that |
| राउर | आपके | your |
| पूत | पुत्र | son |
| न | नहीं | not |
| होहीं | हैं | is |
| आनेहु | आप लाए | you brought |
| मोल | मूल्य देकर | for a price |
| बेसाहि | खरीदकर | having purchased |
| कि | क्या | did you |
| मोही | मुझे | me |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.3
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 368
- सहायक विषय
- दशरथ-कैकेयी-संवाद और दशरथ-शोक, सुमन्त्रका महलमें जाना और वहाँसे लौटकर श्रीरामजीको महलमें भेजना
- मुद्रित पृष्ठ
- 368, 369
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।